Monday, March 14, 2011

स्विस बैंक के ज्यादा खाते नहीं खंगाल पाएगा भारत


 काले धन को लेकर चौतरफा सवालों से घिरी भारत सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। स्विट्जरलैंड के बैंकों ने अपनी सरकार से अपील की है कि वह किसी भी देश द्वारा बड़ी संख्या में खातों की जानकारी देने के अनुरोध को ठुकरा दे। इससे भारत सरकार द्वारा वहां से काला धन वापस लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है। अनुमान है कि भारतीयों की करीब 70 लाख करोड़ रुपये की काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा है। मालूम हो कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते स्विट्जरलैंड सरकार ने 15 फरवरी को गोपनीय बैंक खातों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के नियमों में ढील देने की घोषणा की थी। काले धन का पता लगाने को कोशिशों में जुटे भारत और उसके जैसे अन्य देशों को स्विस सरकार के इस कदम से फायदा होने की उम्मीद है। भारत सरकार ने भी पिछले सप्ताह संसद को स्विट्रलैंड के नियमों में ढील के प्रस्ताव की जानकारी दी थी। स्विट्जरलैंड के बैंकों को अपने ग्राहकों की संपत्तियां और खातों की जानकारी गुप्त रखने के लिए जाना जाता है। इन बैंकों ने सरकार को आगाह किया है कि वह किसी भी दूसरे देश के साथ स्वत: सूचना आदान-प्रदान के करार पर दस्तखत न करे। स्विस बैंकों ने अपने शीर्ष संगठन स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (एसबीए) के माध्यम से सरकार तक यह बात पहुंचाई है। एसबीए ने सरकार से कहा कि वैश्विक बैंकिंग प्रणाली में स्विस वित्तीय केंद्र के हितों की रक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। एसबीए ने एक बयान के जरिए सरकार को बैंकिंग सूचना आदान-प्रदान के नियमों में ढील देने के प्रस्ताव पर बैंकों के विचारों से अवगत कराते हुए ये बातें कहीं। हालांकि यूरोपीय देश भारत जैसे देशों को बैंकिंग जानकारी उपलब्ध कराने के अपने नियमों में ढील देने की तैयारी कर रहे हैं। ज्ञात हो कि यदि किसी दूसरे देश का स्विट्जरलैंड के साथ सूचना आदान-प्रदान करार है, तो वह देश स्विस सरकार को कर चोरी करने वाले संदिग्ध लोगों के नाम और पते बताकर सरकार से मदद ले सकता है। भारत सरकार पर काले धन को विदेशों से लाने को लेकर विपक्ष के अलावा अदालत का भी काफी दबाव है। उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि सरकार को विदेशों में काला धन जमा कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा कराए गए काले धन का पता लगाने के लिए भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संधि का प्रस्ताव इस समय स्विस संसद के पास है। अपनी सरकार के कदम के बारे में स्विस बैंकों का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन संशोधनों से मौजूदा प्रशासनिक सहयोग प्रक्रियाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा|

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