Wednesday, March 23, 2011

मुख्यमंत्रियों के काले धन को भी अली ने लगाया ठिकाने


 हजारों करोड़ रुपये की कर चोरी के आरोपों से गुजर रहे हसन अली ने 90 के दशक में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की काली कमाई को भी ठिकाने लगाया था। एक अंग्रेजी अखबार में इस संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को महाराष्ट्र विधान परिषद में यह मामला उठा। विधान परिषद में विपक्ष के नेता पांडुरंग फुंदकर ने हसन अली संबंधी रिपोर्ट वाली अखबार की प्रति सदन में दिखाते हुए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये तीन पूर्व मुख्यमंत्री कौन हैं। हसन अली के वक्तव्य का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने वर्ष 1990 से 2000 के बीच शेयर बाजार में निवेश करने के लिए नौकरशाहों तथा तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के धन का इस्तेमाल किया। फंुदकर ने इसी रिपोर्ट के हवाले से कहा कि वर्ष 1999 से 2000 के बीच शेयर बाजार में काफी काले धन का निवेश हुआ और अली ने नेताओं, नौकरशाहों और मुख्यमंत्रियों के धन का इस्तेमाल किया। इसके जवाब में महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री राजेंद्र दर्डा ने कहा कि जिन दस्तावेजों के आधार पर खबर प्रकाशित हुई है, उनकी प्रमाणिकता जांचने की जरूरत है क्योंकि ये सरकारी दस्तावेज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह मालूम करना होगा कि ये दस्तावेज कहां से आए। किसी पत्रिका या वेबसाइट ने सूचना दी है, महज इस आधार पर खबर पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए शिवसेना तथा भाजपा सदस्य नारेबाजी करते हुए सभापति के आसन के निकट आ गए। इसके बाद सभापति शिवाजीराव देशमुख ने बैठक 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर सभापति ने मंत्री को दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने के निर्देश दिए|

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