बजट 1800 करोड़ रुपये हो और फिजूलखर्ची सात से आठ सौ करोड़ हो तो आप उसे क्या कहेंगे? खर्च की मनमानी या लूट। राष्ट्रमंडल आयोजन समिति में भी यही हुआ। मंगलवार को सरकार को दी रिपोर्ट में वीके शंुगलू ने सीधे तौर पर आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। समिति का मानना है कि कैटरिंग से लेकर दूसरे कई मामलों में जानबूझकर देरी की गई जिसके कारण पैसों की लूट हुई। राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की जिम्मेदारी का हवाला देकर अपना बचाव करने में जुटे कलमाड़ी के लिए शुंगलू ने परेशानी बढ़ा दी है। बताते हैं कि शुंगलू रिपोर्ट में कैटरिंग, ओवरलेज, टीएसआर, उद्घाटन व समापन समारोह जैसे सभी मामलों में फिजूलखर्ची पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। कैटरिंग कांट्रेक्ट को लेकर अंतिम समय तक चलते रहे खेल पर रिपोर्ट ने आपत्ति जताई है। कैटरिंग के लिए पहले डीलावेयर नार्थ को कांट्रेक्ट देने का मन बना लिया गया था। अंतिम समय में कलमाड़ी ने उसे रद कर दिया। आखिरी समय में नया कांट्रेक्ट तय किया गया जिसके कारण तकरीबन 20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। समिति का मानना है कि कलमाड़ी ने विभिन्न सामानों की खरीद में भी जानबूझकर देरी की और उसका खामियाजा सरकारी खजाने को भुगतना पड़ा। ओवरलेज को लेकर सवाल उठते रहे हैं। समिति का भी मानना है कि जो काम 300 करोड़ में होने चाहिए थे उसके लिए लगभग दोगुना दाम दिया गया। कारण फिर से जानबूझकर की गई देरी थी। टीएसआर का जिम्मा स्विस टाइमिंग को दिया गया था। मेलबर्न में इसका जिम्मा संभाल चुके स्विस टाइमिंग ने दिल्ली में कहीं ज्यादा पैसे लिए थे। स्विस टाइमिंग ने पहले ही अपनी ओर से सार्वजनिक सफाई दी है, पर समिति को लगता है कि आयोजन समिति ने यहां भी जानबूझकर लूट की छूट दे दी थी। समिति पहले की रिपोर्ट में कह चुकी है कि पूरे खेल पर मनी सिंड्रोम हावी था जिस कारण हर अनुबंध में 25-35 फीसदी ज्यादा कीमत चुकाई गई। लूट हर ओर मची थी। सूत्रों के अनुसार आयोजन समिति के सदस्यों ने भी कई मामलों में ठेकेदारों की ओर से कई फर्जी पर्ची देकर घोटाला किया। उद्घाटन और समापन समारोह में हुए खर्च पर भी इस देरी का असर था। जांच समिति का मानना है कि आयोजन समिति कोई भी दलील दे, इस जिम्मेदारी से नहीं मुकर सकती है कि उसने फैसले लेने में देरी की और उसका फायदा हर ठेकेदार ने उठाया|
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