राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के दौरान फैसला लेने में देरी कर टीम कलमाड़ी ने लूट को अंजाम दिया। राष्ट्रमंडल खेल की आयोजन समिति के कामकाज पर वीके शुंगलू की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अहम फैसले में जानबूझकर देरी की गई और अंतिम समय में मनचाही कंपनियों को दो से तीन गुना अधिक कीमत पर ठेका दे दिया गया। इस तरह से आयोजन समिति ने सैकड़ों करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची की। ओवरले, टीएसआर, विदेशी प्रसारण का अधिकार, विज्ञापन जुटाना, खेल प्रबंधन प्रणाली, खान-पान के काम को अंतिम समय तक जानबूझकर लटकाए रखा गया और अंतिम समय में हायतौबा मचाकर मनचाही कंपनियों को यह ठेके दे दिए गए। अंतिम समय में ठेके देने के कारण न तो कंपनियों से मोलभाव हो पाया और न ही उनके द्वारा सप्लाई किए सामानों की गुणवत्ता की जांच की जा सकी। खेलों के सर पर होने के कारण इन ठेकों पर उंगली उठाने की हिम्मत किसी ने नहीं की। इस तरह टीम कलमाड़ी ने देश को हजार करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगा दिया। शुंगलू समिति के अनुसार राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियों के दौरान सारी शक्ति आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और उनके करीबी लोगों तक सीमित थी। कहने को आयोजन समिति में 500 सदस्यों वाली आम सभा और एक कार्यकारी बोर्ड भी था, लेकिन हकीकत में ये दोनों ही सिर्फ नाम भर के लिए थे। शुंगलू समिति ने एक व्यक्ति के आसपास शक्ति के अत्यधिक केंद्रित हो जाने को तमाम गड़बडि़यों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। शुंगलू समिति के अनुसार पूरी आयोजन समिति को सुरेश कलमाड़ी मनमाने तरीके से चला रहे थे। आयोजन समिति के कार्यालय में नियुक्तियों से लेकर प्रोन्नति तक में किसी नियम-कानून का पालन नहीं किया गया। आयोजन समिति कार्यालय में नियुक्ति के लिए प्रतिभा के बजाय कलमाड़ी व उनके नजदीकी अधिकारियों की सिफारिश पर ध्यान दिया जाता था। इसके साथ ही शुंगलू समिति ने आयोजन समिति में परामर्शदाताओं और सलाहकारों की नियुक्ति पर सवाल उठाया है। उसके अनुसार जरूरत नहीं होने पर भी सिर्फ खास लोगों को खुश करने के लिए उन्हें परामर्शदाता या सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। समिति ने पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर को विदेशी सलाहकार के रूप में 13.5 लाख रुपये दिए जाने पर भी सवालिया निशान लगाया ह|
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