Monday, April 25, 2011

सामाजिक योजनाओं में भ्रष्टाचार के दीमक चाट गए सपने


महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना के सहारे प्रदेश में गरीबों ने जो ख्वाब बुने, उन्हें बिखरने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। पात्र होने के लाख सबूत भी दिल नहीं पिघला पाए। विभिन्न जिलों में उभरी तस्वीरों से यह साफ है कि सरकार के चाहने से क्या होगा, जब तक कर्मचारी न चाहें। मेरठ मंडल में महामाया आर्थिक मदद योजना के अंतर्गत पहले चरण के सत्यापन में 606 परिवार फर्जी निकले। मेरठ में 252715 गरीब परिवार चिन्हित हुए, जिसमें शहरी क्षेत्र के परिवार 114395 हैं। इनमें से कुल 16276 को ही यह लाभ दिया जा रहा है। सहारनपुर मंडल में यह योजना गरीबों के ख्वाब को साकार नहीं कर पाई। मुरादाबाद मंडल में मुरादाबाद से 54500, जेपीनगर में 21701, बिजनौर से 87506 व रामपुर से 36897 लाभार्थियों के नामों की सूची संबंधित जिलाधिकारियों ने शासन को भेजी। खाता खुलवाने के दौरान पता चला कि कई लाभार्थियों फर्जी हैं और कई ने अपने नाम दो-तीन स्थानों से दर्ज कराए हैं। फर्जी नाम काटने के बाद जेपीनगर में 18687, बिजनौर में 70347, मुरादाबाद में 47300 व रामपुर में 25012 लाभार्थी ही रह गए थे। बरेली मंडल मुख्यालय में ही पहले चरण में 27 हजार लोग लाभान्वित हुए। दूसरे चरण में सिर्फ नौ हजार लोगों को पैसा मिला। बदायूं में चयनित 52 हजार लाभार्थियों को पेंशन की पहली किश्त मिल चुकी है। पहले चक्र में जिले में 70 हजार लोगों का सर्वे कराया गया था। शिकायतें मिलने के बाद दोबारा सर्वे हुआ तो 52 हजार का चयन कर किया गया। अलीगढ़ मंडल के गरीबों के साथ खूब छलावा हुआ। शासन ने 36,595 गरीबों का लक्ष्य तय किया था। इनके सर्वे में 12 हजार अपात्रों के नाम शामिल कर दिए। सरकारी सेवाओं में कार्यरत लोग भी इसमें शामिल थे। 44 गांवों और 56 वार्डो को गरीब विहीन बता दिया गया। पुन: जांच हुई तो असलियत सामने आई। फर्जीवाड़े की गूंज लखनऊ तक पहुंची तो लाभार्थियों की संख्या 36 हजार से घटाकर 24500 कर दी। आगरा मंडल के आगरा, फीरोजाबाद, मथुरा और मैनपुरी जिलों में कुल 1416.25 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। शासन स्तर से सख्ती होने पर आनन-फानन में लाभार्थियों का चयन हुआ और धड़ाधड़ खाता नंबरों की फीडिंग कर धनराशि भेजने की कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई। मैनपुरी को छोड़ अन्य जिलों ने मार्च में ही लक्ष्य को सौ फीसदी दर्शा दिया। सूत्रों के मुताबिक आगरा में करीब 12 प्रतिशत, फीरोजाबाद में 18 प्रतिशत और मथुरा में लगभग 30 प्रतिशत खाता नंबर गलत फीड किए गए थे। ऐसे में बैंकों ने धन वापस कर दिया।लखनऊ नगर निगम की ओर से भेजी गई पात्र सूची में दलालों ने सैकड़ों नाम गायब कर फर्जी नाम जोड़ समाज कल्याण विभाग को भेज दिये। गोरखपुर, वाराणसी आदि मंडलों की भी कमोवेश यही तस्वीर है। सच यह है कि हजारों लोग अर्जी डालकर चार सौ रुपये मासिक के लिए एक साल से मदद की आस में हैं। विभागीय आंकड़ों में तो सब कुछ ठीक ठाक है।


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