Thursday, April 7, 2011

सरकारी आरोपों से आहत अन्ना उबले


सरकार और कांग्रेस की ओर से अपने अनशन पर लगाए जा रहे आरोपों के बाद अन्ना हजारे ने अपने तेवर और कड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मैं कोई बच्चा नहीं कि कोई बहका कर अनशन पर बिठा दे। मैं अपने विवेक से यह आंदोलन कर रहा हूं। हां, मनमोहन सिंह सरकार जरूर रिमोट से चल रही है। अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बुधवार को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार और कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मुझे कुछ लोगों ने अनशन पर बैठने को उकसाया है। मनमोहन सिंह जी, यह मेरी समझ और बुद्धि का अपमान है। मैं कोई बच्चा नहीं कि मुझे भड़का कर आमरण अनशन पर बिठा दिया जाए। सरकारी आरोपों से आहत अन्ना ने लिखा है कि मेरा अनुभव रहा है कि जब सरकार दबने लगती है तो कीचड़ उछालना शुरू करती है। अनशन पर बैठे अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अन्ना ने इस पत्र का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अच्छे व्यक्ति हैं। उनके भ्रष्टाचार के बारे में कोई जानकारी अब तक सामने नहीं आई है, लेकिन रिमोट कंट्रोल से गड़बड़ी हो जाती है। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें। अन्ना ने कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर उन्हें भी 5 तारीख को उपवास रखने की अपील की थी। उनका जवाब तो नहीं आया, लेकिन आशा है कि उन्होंने उस दिन उपवास रखा होगा। सरकार और कांग्रेस के प्रवक्ताओं की ओर से बेसब्री के आरोप पर भी अन्ना जमकर बरसे। कहा, अगर आपको वाकई लगता है कि मैं उतावला हूं तो मुझे खुशी है। क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी सरकार की सुस्ती से सारा देश उतावला हो गया है|
1-सरकारी लोकपाल के पास भ्रष्टाचार के मामलों पर ख़ुद या आम लोगों की शिकायत पर सीधे कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं होगा. सांसदों से संबंधित मामलों में आम लोगों को अपनी शिकायतें राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष को भेजनी होगी, वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के तहत लोकपाल ख़ुद किसी भी मामले की जांच शुरू करने का अधिकार रखता है, इसमें किसी से जांच के लिए अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है। 2-सरकारी विधेयक में लोकपाल के पास पुलिस शक्ति नहीं होगी, जनलोकपाल न केवल प्राथमिकी दर्ज करा पाएगा बल्कि उसके पास पुलिस फोर्स भी होगी। 3- अगर कोई शिकायत झूठी पाई जाती है तो सरकारी विधेयक में शिकायतकर्ता को जेल भी भेजा जा सकता है, लेकिन जनलोकपाल बिल में झूठी शिकायत करने वाले पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। 4-सरकारी विधेयक में लोकपाल का अधिकार क्षेत्र सांसद, मंत्री और प्रधानमंत्री तक सीमित रहेगा। जनलोकपाल के दायरे में प्रधानमत्री समेत नेता, अधिकारी, न्यायाधीश सभी आएंगे। 5-लोकपाल में तीन सदस्य होंगे जो सभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। जनलोकपाल में 10 सदस्य होंगे और इसका एक अध्यक्ष होगा। चार कानून के जानकार होंगे, बाकी का चयन किसी भी क्षेत्र से होगा। 6-सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल को नियुक्त करने वाली समिति में उपराष्ट्रपति. प्रधानमंत्री, दोनों सदनों के नेता, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता, कानून और गृह मंत्री होंगे। वहीं प्रस्तावित जनलोकपाल बिल में न्यायिक क्षेत्र के लोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारतीय मूल के नोबेल और मैग्सेसे पुरस्कार के विजेता चयन करेंगे। 7-लोकपाल की जांच पूरी होने के लिए छह महीने से लेकर एक साल का समय तय किया गया है। प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के अनुसार एक साल में जांच पूरी होनी चाहिए और अदालती कार्यवाही भी उसके एक साल में पूरी होनी चाहिए। 8-सरकारी लोकपाल विधेयक में नौकरशाहों और जजों के खिलाफ जांच का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन जनलोकपाल के तहत नौकरशाहों और जजों के खिलाफ भी जांच करने का अधिकार शामिल है। भ्रष्ट अफसरों को लोकपाल बर्खास्त कर सकेगा। 9-सरकारी लोकपाल विधेयक में दोषी को छह से सात महीने की सजा हो सकती है और घोटाले के धन को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं जनलोकपाल बिल में कम से कम पांच साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा हो सकती है। साथ ही घोटाले की भरपाई का भी प्रावधान है। 10-ऐसी स्थिति मे जिसमें लोकपाल भ्रष्ट पाया जाए, उसमें जनलोकपाल बिल में उसको पद से हटाने का प्रावधान भी है। इसी के साथ केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, सीबीआइ की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा सभी को जनलोकपाल का हिस्सा बनाने का प्रावधान भी है|

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