केंद्र सरकार में अपनी पसंद के मंत्री बनवाने के लिए कंपनियों की लामबंदी की बात अब पुष्ट हो गई है। देश के प्रमुख्र उद्योगपति रतन टाटा ने स्वीकार किया है कि ए. राजा को संचार मंत्री बनवाने के लिए उन्होंने द्रमुक अध्यक्ष करुणानिधि को चिठ्ठी लिखी थी और इसे कारपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के जरिए भिजवाया था। संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने पेश हुए टाटा से लगभग तीन घंटे की पूछताछ में स्वीकार किया राडिया के बातचीत में टेप की गई आवाज उनकी है। इसके पहले समिति के सामने पेश हुई नीरा राडिया को जवाब देने के लिए समिति को फटकार और अवमानना का डर दिखाने का सहारा लेना पड़ा। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच कर रही संसद की लोक लेखा समिति सामने पेश हुए टाटा ने बिना किसी हील हुज्जत के स्वीकार कर लिया कि तत्कालीन संचार मंत्री मारन से उनको दिक्कत आ रही थी और इसीलिए उन्होंने ए. राजा को मंत्री बनवाने के लिए लामबंदी की थी। उन्होंने यूनिटेक वायरलेस को 1600 करोड़ रुपए देने की बात भी स्वीकार की और कहा कि यह राशि उन्हें मय सूद के वापस भी मिल गई थी। लोक लेखा समिति के अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी ने बताया कि उद्योगपति अनिल अंबानी, अतुल झाम (एतिलासात), यूनिटेक के प्रबंध निदेशक एस विर्क, एस टेल सीईओ समित दास से मंगलवार को पूछताछ होगी। टाटा ने इस बात से इंकार किया कि 2जी आवंटन में उनको किसी तरह का लाभ नहीं हुआ। वैसे टाटा इस सवाल का ठीक से जवाब नहीं दे सके कि सरकार से परेशानी आने पर उन्होंने 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखा था, लेकिन इस बार वह मंत्री बनवाने की लामबंदी में क्यों लग गए। इसके पहले समिति के सामने पेश हुई नीरा राडिया ने समिति से कहा कि बातचीत के कुछ टेप से छेड़छाड़ हुई, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि सीबीआइ जो टेप उन्हें सुनवाया है, वह सही है। समिति ने उनसे इस टेप की सूची मांगी है। शुरुआत में राडिया सवालों को टालती रहीं। डॉ. जोशी ने कहा कि राडिया बहुत साफ-साफ तथ्य सामने नहीं रख रही थी। टेप के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कभी कहा कि सुना नहीं, कभी कहा कि याद नहीं। इस पर उन्हें उन्हें यह चेतावनी भी दी गई कि इसके लिए उनको संसदीय अवमानना का सामना भी करना पड़ सकता है|
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