Monday, April 25, 2011

महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के सर्वाधिक मामले


भ्रष्टाचार पर देशभर में छिड़े बवाल की पृष्ठभूमि में यह बात जले पर नमक छिड़कने जैसी हो सकती है कि महाराष्ट्र जैसा बड़ा राज्य भ्रष्टाचार की सीढ़ी में शीर्ष पायदान पर खड़ा है लेकिन वहां दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों की संख्या के मुकाबले दोषियों को सजा दिए जाने का प्रतिशत बहुत कम है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2000 से लेकर 2009 के बीच महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के कुल 4566 मामले दर्ज किए गए और उनमें केवल 27 फीसद मामलों में ही आरोपियों पर दोष साबित हो पाए। इन मामलों में राज्य में नौ करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई। ब्यूरो के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह भी बात सामने आती है कि देश में वर्ष 2000 से लेकर अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में साल दर साल इजाफा ही होता जा रहा है। वर्ष 2000 में जहां देश में भ्रष्टाचार के कुल 2943 मामले दर्ज किए गए तो वहीं 2009 में 3683। इन मामलों में 60 फीसद दोष सिद्धि हुई और करीब 60 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई। वर्ष 2000 से लेकर 2009 के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, उड़ीसा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में भ्रष्टाचार के सर्वाधिक क्र मश: 4566, 3770, 2957, 2714 और 2686 मामले दर्ज किए गए। इन राज्यों में भ्रष्टाचारियों को कानून के कठघरे में खड़ा करने की दर हालांकि उत्साहवर्धक नहीं रही। संबंधित राज्यों में इसका प्रतिशत क्र मश: 27, 33, 33, 36 और 58 प्रतिशत रहा । कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जिन पांच राज्यों में भ्रष्टाचार के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए उनमें से केवल आंध्र प्रदेश में अन्य राज्यों के मुकाबले दोषियों को सजा दिए जाने का प्रतिशत सर्वाधिक था। कुछ राज्यों ने भ्रष्टाचारियों से निपटने की इस मुहिम में काफी शानदार प्रदर्शन किया है। ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में भ्रष्टाचार के 225 मामले दर्ज किए गए और भ्रष्टाचारियों को सींखचों के पीछे पहुंचाने की दर 350 फीसद रही तथा 30 लाख की संपत्ति जब्त की गई । भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की दिशा में नगालैंड, लक्षदीप और बिहार ने भी शानदार प्रदर्शन किया। लक्षदीप में जहां सौ फीसदी दोष सिद्धि दर रही तो वहीं बिहार में दोषियों को सजा देने का प्रतिशत 78 फीसद रहा। आंकड़ों से एक उत्साहजनक चलन का भी पता चलता है। वर्ष 2000 में जहां भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा दिए जाने का प्रतिशत मात्र 20 था जो वर्ष 2009 में बढ़कर 60 फीसदी तक जा पहुंचा।

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