राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में भ्रष्टाचार की प्रामाणिक जानकारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास 2007 में ही पहुंच गई थी। यह खुद खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर ने लिखित रूप में दी थी। यह पहला मौका था जब किसी आयोजन के प्रशासनिक इंतजाम व आर्थिक आवंटन के लिए जिम्मेदार केंद्रीय मंत्री ने भ्रष्टाचार की शिकायत प्रधानमंत्री से की और वह भी बड़े बेबाक ढंग से। बावजूद इसके अय्यर की चिट्ठी फाइलों में छिपा दी गई और टीम कलमाड़ी को घोटाले की भरपूर छूट मिल गई। मणिशंकर ने लिखा था, कलमाड़ी खेल मंत्रालय को दुधारु गाय की तरह दुह रहे हैं। उनके लिए किसी नियम कानून का कोई मतलब नहीं हैं। अय्यर का यह सनसनीखेज पत्र दैनिक जागरण के पास है। 25 अक्टूबर 2007 को पीएम को लिखी गई तीन पेज की इस गोपनीय चिट्ठी को शुंगलू समिति ने भी शायद इसलिए छिपा लिया, क्योंकि यह सीधे पीएमओ को सवालों के घेरे में खड़ा करती है। आयोजन समिति की कमान खेल मंत्री सुनील दत्त से छीनकर कलमाड़ी को देने में पीएमओ की भूमिका का खुलासा जागरण पहले ही कर चुका है और वह पत्र भी सामने ला चुका है जिसमें अय्यर ने कहा था कि वह पूरा मामला सोनिया गंाधी तक पहुंचाएंगे। राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन खेल मंत्रालय के तहत था और आयोजन समिति को पैसा भी मंत्रालय के जरिये जाता था कि इसलिए आयोजन में भ्रष्टाचार पर खेल मंत्री की शिकायत से ज्यादा अहम कुछ नहीं था। अय्यर लिखते हैं, मैं आयोजन समिति के अध्यक्ष के भारी खर्च से परेशान हूं। .वह मेरे मंत्रालय को दुधारु गाय मानकर अधिकतम पैसा निकालना चाहते हैं। वह बेसिर पैर के हर खर्च पर मंत्रालय की मुहर चाहते हैं। .वह किसी वित्तीय नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। अय्यर ने यह भी लिखा था कि कलमाड़ी खर्चो की मंजूरी के लिए एक्जीक्यूटिव बोर्ड की उप समिति बनाना चाहते हैं ताकि बोर्ड में मौजूद केंद्र सरकार के अधिकारी उनके फैसलों पर सवाल न उठा सकें। यह पत्र अय्यर व कलमाड़ी के बीच हुए विवाद का प्रमाण भी है। क्षुब्ध अय्यर ने अपने पत्र में कहा था कि कलमाड़ी खेल मंत्रालय को कार्टूनों का जमघट बताते हैं। खेल मंत्रालय व आयोजन समिति के बीच कोई तालमेल नहीं है और मंत्रियों की समिति की कोई रचनात्मक भूमिका नहीं है। अय्यर की सिफारिश थी कि आयोजन समिति और एक्जीक्यूटिव बोर्ड का पुनर्गठन करके किसी युवा सांसद को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन का मंत्री बनाकर उसे समिति की अध्यक्षता दे दी जाए। इस सिफारिश के बाद अय्यर तो मंत्रालय से विदा हो गए, मगर कलमाड़ी आयोजन समिति में टिके रहे और घोटाले करके ही बाहर निकले|
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