Friday, April 22, 2011

कालेधन की जांच में अड़ंगा


 विदेशों में काला धन जमा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही में ढीले ढाले रवैये को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने गुरुवार को फिर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि एजेंसियों को जांच का काम देने के मामले में क्या सरकार अभी तक सो रही थी। हालांकि केंद्र ने भी मामले की जांच को एसआइटी गठित करने और किसी बाहरी को उसका मुखिया बनाने का विरोध किया। सरकार खातेदारों के नामों का खुलासा न करने पर भी डटी रही। न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी व एसएस निज्जर की पीठ के समक्ष सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने जांच का काम विभिन्न एजेंसियों को बांटने का सुझाव देते हुए कहा, पासपोर्ट मामले की जांच सीबीआइ और यूबीएस का मामला रिजर्व बैंक को सौंप दिया जाए। इस दलील पर निज्जर ने कहा, अभी तक ये विभाग क्या सो रहे थे। इस तीखी टिप्पणीं पर सुब्रमण्यम ने कहा,एजेंसियों को जांच से पहले मामला दर्ज करना पड़ता है और राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती है। इससे पूर्व न्यायमूर्ति रेड्डी ने सरकार से पूछा कि वह सिर्फ दो व्यक्तियों के ही खिलाफ जांच कर रही है। बाकी मामलों में क्या हुआ? सरकार को जो जानकारी मिली है क्या उसमें और किसी भारतीय पर कालाधन रखने का संदेह नहीं है? किसी कंपनी समूह के शामिल होने की भी बात पता चली है उसमें क्या हुआ? सुब्रमण्यम ने दलील दी कि सभी मामलों की जांच चल रही है पर याचिका में एक व्यक्ति के बारे में पूछा गया था। अदालत ने एक से अधिक एजेंसियों के मिल कर काम करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा, ईडी मनी लांड्रिंग में जांच कर सकता है परंतु इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू भी शामिल है। क्या पैसा आतंकी स्रोतों से आया था या नशीली दवाओं के जरिए। ईडी की रिपोर्ट में भी विभिन्न विभागों से संपर्क की बात कही गई है। ऐसे में वे सभी के बीच संयोजन व निगरानी के लिए सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश को एसआईटी का मुखिया बनाने की बात कर रहे हैं। वैसे भी सरकार की मदद के बिना यह जांच नहीं हो सकती। इस पर सुब्रमण्यम ने कहा, बाहरी व्यक्ति के नेतृत्व में एसआइटी तभी गठित होनी चाहिए जब अदालत को लगे कि जांच एजेंसी ठीक काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने सरकार से निर्देश के लिए अदालत से सोमवार तक का समय मांग लिया।

No comments:

Post a Comment