Sunday, April 10, 2011

विकसित राष्ट्र की राह में भ्रष्टाचार बड़ी बाधा



 यह महज संयोग नहीं था कि देश का पूरा उद्योग जगत अन्ना हजारे के अभियान को समर्थन देने के लिए जुट गया। इंडिया इंक को लगता है कि भ्रष्टाचार का दीमक अर्थव्यवस्था को भी चट करने लगा है। अगर हालात नहीं बदले तो यह देश में निवेश के पूरे माहौल का खराब कर सकता है। ऐसा माहौल न सिर्फ शेयर बाजार को मंदी की ओर ढकेल सकता है बल्कि विदेशी निवेशकों को भी दूर कर सकता है। देश के प्रमुख उद्योग चैंबर सीआइआइ के अध्यक्ष हरि एस भारतीय ने दैनिक जागरण से बातचीत में माना कि भ्रष्टाचार तेज आर्थिक विकास दर के रास्ते में एक बड़ी बाधा है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से अन्ना हजारे के नेतृत्व में जो अभियान चला उसका सीआइआइ ने पूरा समर्थन किया। सीआइआइ ने प्रमुख उद्योगपति आदि गोदरेज की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित करने का एलान किया है जो भ्रष्टाचार मिटाने में सरकार की मदद करेगा। सीआइआइ और फिक्की ने अन्ना हजारे और केंद्र सरकार के बीच हुए समझौते को एक बड़ी उपलब्धि माना है। फिक्की के महानिदेशक राजीव कुमार ने बताया कि, आप समझ नहीं सकते भ्रष्टाचार ने देश की छवि को कितना नुकसान पहुंचाया है। पिछले कुछ हफ्तों के भीतर फाइनेंशियल टाइम्स और सिंगापुर टाइम्स सहित कई विदेशी अखबारों ने भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है। अगर भ्रष्टाचार पर रोक लगती है तो यह देश में निवेश को बढ़ाने में भी काफी मदद करेगा। इस बात को न सिर्फ फिक्की बल्कि देश के 68 फीसदी उद्योगपति मानते हैं। पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार कंपनी केपीएमजी ने एक सर्वेक्षण के आधार पर बताया कि भ्रष्टाचार भारत की आर्थिक प्रगति को किस तरह प्रभावित कर रहा है। अधिकांश उद्योगपति सोचते हैं कि अगर भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगी तो नौ फीसदी से ज्यादा की विकास दर को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। 51 फीसदी उद्योगपतियों ने कहा है कि भ्रष्टाचार की वजह से देश में कम निवेश आएगा। यह पूंजी बाजार के प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है। जब भी घोटालों की खबर सामने आती है, शेयर बाजार में गिरावट देखी जा सकती है। इससे आर्थिक विकास दर भी घट सकती है। केपीएमजी ने कहा है कि भारत के एक विकासशील देश से विकसित देश बनने के रास्ते में भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ी रुकावट है। वर्ष 2010-11 में इंडोनेशिया सहित अन्य विकासशील देशों के मुकाबले भारत में कम विदेशी निवेश आने के लिए भ्रष्टाचार को ही प्रमुख वजह माना गया है|

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