2जी घोटाले की जांच कर रही संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी लपेट लिया है। हालांकि इसके लिए जिम्मेदार प्रधानमंत्री कार्यालय को ठहराया गया है, जिसने न केवल प्रधानमंत्री को गुमराह किया, बल्कि एक तरह से मूक दर्शक बना रहा। समिति ने प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि उनकी निष्कि्रयता ने ए राजा को मनमाने ढंग से अपने निर्णयों पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी थी। समिति ने तब वित्त मंत्री रहे चिदंबरम को कठघरे में खड़ा किया, लेकिन बाद के वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की सराहना की है। पीएसी अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 270 पृष्ठों वाली मसौदा (ड्राफ्ट) रिपोर्ट सभी सदस्यों के पास भेज दी है। इस रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू यह है कि उसने प्रधानमंत्री को भी नहीं बख्शा। समिति ने कहा है कि संचार मंत्री के 3 जनवरी 2008 के पत्र से पता चलता है कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से मंत्रालय को अपनी योजना व निर्णयों के मुताबिक आगे बढ़ने की हरी झंडी दे दी थी। साथ ही प्रधानमंत्री को इस मामले में मंत्रालय ने तब जानकारी दी जब इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी। समिति ने इतने अहम मामले पर भी प्रधानमंत्री के दूरसंचार मंत्रालय से अनौपचारिक रूप से मुद्दा उठाने पर सवाल खड़ा किया है। समिति ने प्रधानमंत्री को गुमराह करने के लिए पीएमओ पर मूक दर्शक बने रहने जैसे करारे प्रहार किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने इस मामले में अपने को इतना दूर रखा कि ए राजा को मनमानी करने का रास्ता मिल गया। समिति ने कहा है कि पीएमओ को कानून मंत्री के सुझाव की जानकारी थी, फिर भी उसने दूरसंचार मंत्री के विचारों को वरीयता दी और मंत्रियों अधिकार प्राप्त मंत्रिमंडलीय समूह के गठन को कोई तवज्जो नहीं दी। समिति की मसौदा रिपोर्ट में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम को भी मामले की जांच के बजाए उसे समाप्त करवाने की कोशिश के लिए जमकर आड़े हाथ लिया गया है। चिदंबरम को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उसे यह जानकर गहरा धक्का लगा कि वित्त मंत्री ने अपने नोट में यह स्वीकार किया कि स्पेक्ट्रम की कीमत दुर्लभता व उपयोगिता पर तय होनी चाहिए। उन्होंने इस जनता के पैसे के नुकसान के मामले की जांच के बजाए प्रधानमंत्री से इस मामले को बंद करने की सिफारिश तक कर डाली।समिति ने कैबिनेट सचिवालय की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणी की है। रिपोर्ट में सारे घोटाले के लिए ए राजा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को यह कहकर गुमराह किया कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के मुद्दे पर विचार किया गया है, जबकि तथ्य यह है कि दूरसंचार आयोग व ट्राई ने इसकी सिफारिश तक नहीं की थी|
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