Monday, April 25, 2011

कोयले के काले धंधे में बढ़ रही माफिया की रार


कोयले की कालाबाजारी में सिर्फ हाथ ही काले नहीं हैं, खून के छींटे भी उड़े हैं। हर पल खूनी खेल का खतरा बना हुआ है। यूपी और झारखंड के माफिया, कारोबारी और नेताओं ने सिंडिकेट खड़ा कर पूरे धंधे को अपने रिमोट से संचालित करना शुरू कर दिया है। जहां सिंडिकेट नहीं बन पाया है, वहां रंगदारी वसूली जा रही है। अब धंधे में वर्चस्व के लिए माफिया की रार बढ़ रही है। सीबीआइ ने 25 मार्च को चंदौली और कानपुर देहात की स्पेशल स्मोकलेश फ्यूल (साफ्ट कोक) बनाने वाली सात फैक्टि्रयों पर छापे के दौरान पाया कि अधिसूचित दर पर कोयला खरीद कर तीन लाख टन कोयले की हेराफेरी की गई, जिससे 75 करोड़ रुपये की काली कमाई हुई। गुरुवार को सीबीआइ ने वाराणसी जिले के विधायक सुशील सिंह, रतन सिंह, पीके तुलस्यान व अनिल अग्रवाल के आवास और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर धंधे में शामिल कारोबारी, सियासी और बाहुबली लोगों का चेहरा उजागर कर दिया। लेकिन सूबे में कई हिंसक घटनाएं होने के बावजूद सरकारी एजेंसियों के हाथ कोयले की रैक में हिस्सेदारी लेने वाले माफिया और सियासी रसूख वालों तक नहीं पहंुचे। चंदासी, काशी, इंदारा, गोरखपुर, अयोध्या, बाराबंकी, शाहजहांपुर और बरेली समेत कई स्टेशनों पर कोयले की रैक आती है। रैक लाने वालों से सांठ-गांठ कर माफिया उनके पार्टनर बन गए हैं। जहां कोई माफिया सिंडिकेट में शामिल नहीं हैं, वहां प्रति रैक 70 हजार की रंगदारी ली जाती है। इसी रंगदारी को लेकर वाराणसी जेल में बंद एक नामचीन माफिया और जेल में बंद एक माफिया विधायक की रार जगजाहिर है। अब एक एमएलसी ने भी दस्तक दे दी है। इनकी वर्चस्व की लड़ाई का नमूना पिछले महीने मऊ में देखने को मिला, जब अपराधियों ने चंदौली के ठेकेदार अजय सिंह का अपहरण कर लिया। मौके पर पहंुची पुलिस ने अजय को छ़ुड़ाते हुए 13 अपहर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। अपहृत ठेकेदार माफिया विधायक से जुड़ा है, जबकि अपहर्ताओं पर एमएलसी का संरक्षण है। इसके पहले धंधे में रोड़ा बनने पर लखनऊ में 21 जून 2005 को पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में पूर्व मंत्री मार्कण्डेय चंद समेत उनके परिवारी जन गिरफ्तार किए गए। इस घटना के कुछ माह बाद ही मऊ जिले की इंदारा चट्टी पर कोयला कारोबारी गजेन्द्र सिंह की हत्या कर दी गई, जिसके प्रतिशोध में मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने दो बदमाशों को मार गिराया। कोयले के धंधे में झारखंड में पहले बलिया के सूरजदेव सिंह का दबदबा रहा, लेकिन उनके निधन के बाद सुरेश सिंह का साम्राज्य स्थापित हो गया है। सूरजदेव के जमाने में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग धनबाद से जुड़े और बाद में माफिया के तार जुड़ते गए।


No comments:

Post a Comment