राष्ट्रमंडल खेल में भ्रष्टाचार का मुख्य चेहरा बने सुरेश कलमाड़ी पर जहां शिकंजा कसना शुरू हुआ है वहीं भाजपा ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को भी घेरने की कवायद शुरू कर दी है। पार्टी ने प्रधानमंत्री पर कलमाड़ी को खुली छूट देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पैसों की बेतहाशा बर्बादी के जिम्मे से वह नहीं बच सकते हैं। उन्हें जवाब देना चाहिए कि मंत्रियों की ओर से लगातार आगाह किए जाने के बाद भी कलमाड़ी को उनका वरद हस्त क्यों मिला हुआ था। राष्ट्रमंडल खेल में अब जबकि धीरे-धीरे पर्दा हटने लगा है, भाजपा ने सीधे प्रधानमंत्री को कठघरे में खड़ा करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। दैनिक जागरण ने पहले ही कुछ चिट्ठियों का खुलासा किया था जिसमें तत्कालीन खेल मंत्री सुनील दत्त से लेकर मणिशंकर अय्यर तक ने कलमाड़ी को लेकर अपनी आशंकाएं जताई थीं। अय्यर ने तो प्रधानमंत्री से लेकर वित्तमंत्री तक कई पत्र लिखकर आगाह किया था कि कलमाड़ी सरकार को दुधारू गाय की तरह दुह रहे हैं। भाजपा के सचिव किरीट सोमैया ने इस पर सवाल उठाया। शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने भी कुछ दस्तावेजी सबूत देते हुए कहा कि तीन खेल मंत्रियों की ओर से लगातार कलमाड़ी को लेकर सवाल उठाए गए। अय्यर के बाद खेल मंत्री बने एमएस गिल ने भी कलमाड़ी की अध्यक्षता में बनी आयोजन समिति पर प्रश्न चिन्ह लगाया था, लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह ने लगाम लगाने की बजाय उन्हें अतिरिक्त शक्तियां दे दीं। फिर तो यह तय था कि कलमाड़ी की ही चलेगी। सोमैया ने कहा कि अपने आचरण के कारण कलमाड़ी गिरफ्त में हैं तो प्रधानमंत्री पर सवाल उठने वाजिब हैं। पैसों की बर्बादी की जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री पर भी डालते हुए सोमैया ने कहा कि अक्टूबर 2004 में पीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में खेल आयोजन पर 1899 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय हुआ था, लेकिन बाद में खजाने का मुंह खोल दिया गया जिसका कलमाड़ी समेत कई लोगों ने खूब फायदा उठाया। उन्होंने कहा कि कलमाड़ी सिर्फ चेहरा हैं। पूरे खेल आयोजन में कईयों के हाथ काले हैं। उन सब पर कार्रवाई होनी चाहिए जबकि प्रधानमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए कि वह कलमाड़ी पर मेहरबान क्यूं रहे।
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