काले धन के देश के सबसे बड़े सौदागर की जुबान खुलने लगी है और ऐसे खतरनाक रहस्य खुलने लगे हैं जिनसे आप वाकई चिंता में डूब जाएंगे। घोड़े और कबाड़ का धंधा करने वाला हसन अली देश में ऐसा समानांतर बैंक चला रहा था जिसका काम बड़े राजनेताओं, अफसरशाहों और बिचौलियों की अवैध कमाई को पहले विदेश भेजना और बाद में इसे वापस लाकर वैध सम्पदा में बदलना था। देश की सर्वोच्च अदालत की पहल पर गिरफ्तार अली ने पूछताछ में जो नाम लिये हैं; उनमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी बताए जा रहे हैं। हवाला के गोरखधंधे में अली विदेशी बैंकों की भी खुलकर मदद लेता था और काली कमाई को सफेद करने के लिए देश के शेयर बाजारों का इस्तेमाल करता था। इस काम के लिए अली का पसंदीदा देश मारीशस था, जो दुनिया भर की काली कमाई को धोने के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। आश्र्चय नहीं कि टू-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले में शामिल कई कम्पनियों के सिरे भी इस छोटे से द्वीपराष्ट्र से ही निकलते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, जिस विदेशी निवेश की ओर हमारा देश टकटकी लगाए बैठा है, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी काली कमाई का हुआ करता था। आर्थिक सुधारों के शुरू होने के बाद हमारे शेयर बाजारों ने जो छलांगें लगाई थीं उसका बड़ा कारण विदेशी निवेशकों द्वारा इन बाजारों में भारी मात्रा में निवेश था। इसके लिए विदेशी निवेशकों का प्रिय माध्यम पार्टिसिपेटरी नोट्स हुआ करते थे जिसमें यह बताने की जरूरत नहीं होती थी कि वास्तविकता में पैसा लगाने वाला कौन है और कहां का है।अली ने भी भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की काली कमाई को सफेद बनाने के लिए इसी रास्ते को चुना था। अब यह समझा जा सकता है कि हवाला के आरोप बार- बार लगने के बावजूद क्यों अली बेखौफ घूमता रहता था? जिसके ऊपर सत्ता के सरमायेदारों का हाथ हो उसे हाथ लगाने की जुर्रत कौन कर सकता है? शायद इसी लिए महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सरकारी प्रकोप झेलना पड़ रहा है जिसने अली से पूछताछ की थी और बकायदे उसकी सीडी भी बनाई थी। हसन अली से प्रवर्त्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में नए खुलासे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिमांड तीन दिनों के लिए और बढ़ा दी है जिसमें और खतरनाक खुलासों की सम्भावना है। अली का सबसे खतरनाक पक्ष वह है जिसमें उसके रिश्ते हथियारों के सौदागर अदनान खशोगी और दुर्दात आतंकवादियों से बताए जा रहे हैं। ईडी यह जानने की कोशिश में है कि केवल पांच करोड़ रुपए से खुले अली के बैंक खाते में देखते-देखते चौवन हजार करोड़ रुपए की बाढ़ कहां से आ गई? दुबई, सऊदी अरब से उसके खाते में धनवर्षा करने वाले छुपे चेहरे कौन थे? आशंका है कि अमेरिकी ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद दुनिया भर के बैंकों पर लगी बंदिशों को देखते हुए आतंकियों ने अली के खाते का जी भर कर इस्तेमाल किया। काला धन हमारे लिए कितना बड़ा खतरा है, क्या अब भी यह बताने की जरूरत है?
Wednesday, March 23, 2011
काला सौदा, काली जुबां
काले धन के देश के सबसे बड़े सौदागर की जुबान खुलने लगी है और ऐसे खतरनाक रहस्य खुलने लगे हैं जिनसे आप वाकई चिंता में डूब जाएंगे। घोड़े और कबाड़ का धंधा करने वाला हसन अली देश में ऐसा समानांतर बैंक चला रहा था जिसका काम बड़े राजनेताओं, अफसरशाहों और बिचौलियों की अवैध कमाई को पहले विदेश भेजना और बाद में इसे वापस लाकर वैध सम्पदा में बदलना था। देश की सर्वोच्च अदालत की पहल पर गिरफ्तार अली ने पूछताछ में जो नाम लिये हैं; उनमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी बताए जा रहे हैं। हवाला के गोरखधंधे में अली विदेशी बैंकों की भी खुलकर मदद लेता था और काली कमाई को सफेद करने के लिए देश के शेयर बाजारों का इस्तेमाल करता था। इस काम के लिए अली का पसंदीदा देश मारीशस था, जो दुनिया भर की काली कमाई को धोने के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। आश्र्चय नहीं कि टू-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले में शामिल कई कम्पनियों के सिरे भी इस छोटे से द्वीपराष्ट्र से ही निकलते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, जिस विदेशी निवेश की ओर हमारा देश टकटकी लगाए बैठा है, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी काली कमाई का हुआ करता था। आर्थिक सुधारों के शुरू होने के बाद हमारे शेयर बाजारों ने जो छलांगें लगाई थीं उसका बड़ा कारण विदेशी निवेशकों द्वारा इन बाजारों में भारी मात्रा में निवेश था। इसके लिए विदेशी निवेशकों का प्रिय माध्यम पार्टिसिपेटरी नोट्स हुआ करते थे जिसमें यह बताने की जरूरत नहीं होती थी कि वास्तविकता में पैसा लगाने वाला कौन है और कहां का है।अली ने भी भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की काली कमाई को सफेद बनाने के लिए इसी रास्ते को चुना था। अब यह समझा जा सकता है कि हवाला के आरोप बार- बार लगने के बावजूद क्यों अली बेखौफ घूमता रहता था? जिसके ऊपर सत्ता के सरमायेदारों का हाथ हो उसे हाथ लगाने की जुर्रत कौन कर सकता है? शायद इसी लिए महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सरकारी प्रकोप झेलना पड़ रहा है जिसने अली से पूछताछ की थी और बकायदे उसकी सीडी भी बनाई थी। हसन अली से प्रवर्त्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में नए खुलासे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिमांड तीन दिनों के लिए और बढ़ा दी है जिसमें और खतरनाक खुलासों की सम्भावना है। अली का सबसे खतरनाक पक्ष वह है जिसमें उसके रिश्ते हथियारों के सौदागर अदनान खशोगी और दुर्दात आतंकवादियों से बताए जा रहे हैं। ईडी यह जानने की कोशिश में है कि केवल पांच करोड़ रुपए से खुले अली के बैंक खाते में देखते-देखते चौवन हजार करोड़ रुपए की बाढ़ कहां से आ गई? दुबई, सऊदी अरब से उसके खाते में धनवर्षा करने वाले छुपे चेहरे कौन थे? आशंका है कि अमेरिकी ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद दुनिया भर के बैंकों पर लगी बंदिशों को देखते हुए आतंकियों ने अली के खाते का जी भर कर इस्तेमाल किया। काला धन हमारे लिए कितना बड़ा खतरा है, क्या अब भी यह बताने की जरूरत है?
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