Friday, March 4, 2011

2जी में Rs 66,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान


माह के अंत तक अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर देगी सीबीआई
सीबीआई का अनुमान है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में करीब 66 हजार करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। फिलहाल सीबीआई की जांच टीम अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है। हो सकता है नुकसान की राशि और भी ज्यादा हो। सूत्रों के अनुसार सीबीआई इस माह के अंत तक इस घोटाले में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर देगी। इसलिए वह हर मोच्रे पर अपनी तैयारी कर रही है। सीबीआई की जांच टीम ने अब तक मिले दस्तावेजों, कंपनियों से पूछताछ, निजी टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा शेयर बेचने और तत्कालीन बाजार की स्थिति को देखने के बाद यह अनुमान लगाया है कि टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले में एफआईआर में दर्ज नुकसान से तीन गुना ज्यादा राजकोष का नुकसान हुआ है। सीबीआई ने एफआईआर में 22 हजार करोड़ रुपए का नुकसान बताया है। लिहाजा यह नुकसान 66 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार वैसे सीबीआई अभी तक अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है। इस विषय पर वह संचार मंत्रालय, ट्राई के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ लगातार गुणा भाग कर रही है। सीबीआई को फिलहाल इन विशेषज्ञों के साथ मिलकर जांच में यह भी मालूम हुआ है कि अगर लाईसेंस की नीलामी होती तो जितना फायदा निजी कंपनियों को हुआ है उससे तीन गुना अधिक राशि सरकारी खजाने में जाती। सीबीआई को जांच में यह मालूम हुआ है कि राजकोष को जो घाटा हुआ है वह मुख्य रूप से अयोग्य कंपनियों को लाईसेंस देने से हुआ है। सीबीआई की जांच कैग की जांच से सहमति जताते हुए फिलहाल इस निष्कर्ष पर है कि राजा ने खुद ही संचार मंत्रालय द्वारा बनायी गयी गाइडलाइंस का उल्लंघन किया। साथ ही योग्यता की जो शत्रे थी उसमें भी फेरबदल किया और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया। जांच में यह भी मालूम हुआ है कि कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए आवेदन की अंतिम तारीख को बदला गया। लिहाजा जो योग्य कंपनियां थीं उनको घाटा हुआ और अयोग्य कंपनियां मालामाल हो गयीं। सीबीआई ने भी जांच में पाया कि कुछ कंपनियां कुछ ही दिन पहले बनीं और स्पेक्ट्रम की दौड़ में शामिल हो गयीं। साथ ही कुछ कंपनियों ने अपनी स्थिति का सही विवरण नहीं दिया। कुछ ने फर्जी दस्तावेज दिए तो कुछ ने मर्जर और एक्वीजीशन के नियमों की अनदेखी की। कंपनियों की इन हरकतों को अधिकारियों ने भी अनदेखा किया। कुछ कंपनियों को मंत्री की कोटरी की सिफारिश पर कम कीमत पर लाइसेंस आबंटित किया गया। सीबीआई इस मामले में ईडी से लगातर सम्पर्क में है।


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