भ्रष्टाचार भारत की तेज आर्थिक विकास दर के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर काबू नहीं पाया गया तो नौ फीसदी की आर्थिक विकास दर को हासिल करना भी मुश्किल हो जाएगा। वित्तीय परामर्श सेवाएं देने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फर्म केपीएमजी ने रिश्वत व भ्रष्टाचार पर अपने सर्वेक्षण में यह बात कही है। सोमवार को जारी इस सर्वे रिपोर्ट में देश के रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन उद्योग को सबसे ज्यादा भ्रष्ट माना गया है। वहीं, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उलझा टेलीकॉम उद्योग दूसरे स्थान पर है। यह रिपोर्ट उद्योग जगत के साथ बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़े 68 फीसदी लोगों ने माना है कि भ्रष्टाचार का स्तर कम हुआ, तभी भारत नौ फीसदी या इससे ज्यादा की आर्थिक विकास दर को हासिल कर सकेगा। 31 फीसदी ने कहा कि करप्शन यानी भ्रष्टाचार नौ फीसदी की विकास दर को हासिल करने में बहुत बड़ी बाधा है। सिर्फ एक फीसदी लोगों ने कहा है कि इसका कोई असर नहीं होगा। इसी तरह 51 फीसदी का कहना है कि भ्रष्टाचार की वजह से देश में विदेशी निवेश कम होगा। 46 फीसदी के मुताबिक निवेश तो आएगा, लेकिन हर क्षेत्र में नहीं। निवेश की यह कमी विकास दर पर विपरीत असर डालेगी। लगभग 32 फीसदी लोगों ने कहा है कि रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है। इसके बाद दूसरे स्थान पर दूरसंचार क्षेत्र को रखा है। सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, गरीबी उन्मूलन) वगैरह को तीसरे स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिन उद्योगों में सरकारी हस्तक्षेप अधिक है, वहां भ्रष्टाचार की ज्यादा संभावनाएं हैं। भारी-भरकम निवेश वाली परियोजनाएं और तमाम सरकारी विभागों से मंजूरी लेने की बाध्यताओं की वजह से भ्रष्टाचार फलता-फूलता है। कॉरपोरेट सेक्टर के 99 फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्टाचार की वजह से भेदभाव होता है, जो कारोबार के रास्ते में भी एक बड़ी बाधा है|
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment