ऊंची कुर्सियों पर बैठे भ्रष्ट और तिकड़मी, देश की सुरक्षा यहां तक कि इसके अस्तित्व को भी दांव पर लगाने से नहीं चूकते; इसका नंगा खेल हम टू-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले और हवालाबाज हसन अली के मामलों में देख चुके हैं। ऊपर से ये दोनों मामले भले अलग दिखें लेकिन सतह को हल्का खुरचते ही आतंकियों और माफिया सरगनाओं के काले निशान हर जगह दिखने लगते हैं। टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में गिरफ्तार शाहिद बलवा के तार अगर कुख्यात माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम से जुड़े बताए जा रहे हैं तो हसन अली को दुनियाभर के कुख्यात आतंकियों का बैंकर कहा जा रहा है। लेकिन असल चिंता की बात इन दोनों की वह गहरी पैठ है जो इन्होंने देश के सत्ता गलियारे में बना ली थी। शुक्र है कि सजग सुप्रीमकोर्ट और आक्रामक मीडिया के दबाव में बलवा और अली सरीखे तिकड़मी सीखचों के पीछे जा चुके हैं और उनके काले कारनामों के बेनकाब होने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। लेकिन दूसरी ओर एक और खतरनाक खेल शुरू हो गया है जिसमें इन मामलों से माफिया के पदचिह्नों को मिटाने की कोशिश है। खबर है कि दाऊद इब्राहिम सीबीआई के दफ्तर पर हमला बोल कर टू-जी स्पेक्ट्रम महा घोटाले के उन दस्तावेजों को नष्ट करने की फिराक में है जिनके सिरे इस माफिया सरगना तक पहुंचते हैं। खुद सीबीआई को मिली इस जानकारी के बाद उसके मुख्यालय में रखे इन दस्तावेजों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और जांच में लगे लोगों को भी पूरा सतर्क रहने का निर्देश दे दिया गया है। लेकिन एक बात जो साफ दिखाई दे रही है वह है इन माफिया सरगनाओं का दुस्साहस, जो देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के मुख्यालय पर भी हमले की साजिश रचने से नहीं डरते। यह साजिश सादिक बाशा के कथित आत्महत्या के रहस्य को और उलझा देने वाली है। बाशा न केवल स्पेक्ट्रम घोटाले से गहराई से जुड़ा था बल्कि वह पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए. राजा के काले कारनामों का राजदार भी था। घोटाले की रकम को दुबई और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में खपाने की जिम्मेदारी उसी की थी और इस सिलसिले में वह दाऊद जैसे माफिया सरगनाओं के सम्पर्क में बताया जाता था। उसकी 'कथित आत्महत्या' उस वक्त हुई जब वह सीबीआई के बुलावे पर दिल्ली जाने की तैयारी कर रहा था। आत्महत्या के घंटों बाद बरामद दिखाए गए सुसाइड नोट में भी अनेक विसंगतियां थीं। हद तो तब हो गई जब उसकी लाश का पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर खुद शक के घेरे में आ गया। जाहिर है कि महाभ्रष्टाचारों की बांसुरी बजाने वाले देश के तमाम सफेदपोश पोल खुलने के डर से हलकान हैं। स्पेक्ट्रम महाघोटाले में आरोपपत्र दाखिल करने का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है उनकी बदहवासी बढ़ती जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और केंद्र में सचिव जैसे बड़े लोग इस आरोपपत्र के सीधे निशाने बनने जा रहे हैं। तमिलनाडु में सत्तासीन डीएमके के सुप्रीमो करुणानिधि की सांसद बेटी और उनकी उम्रदराज पत्नी आरोपों के घेरे में हैं। देश के सर्वशक्तिमान उद्योगपतियों और व्यापारियों पर आरोपों का शिंकजा कसता जा रहा है। ये सब वही लोग हैं जो लाइसेंस राज में भी कमाते थे और आर्थिक सुधारों की आड़ में भी इनका धंधा बदस्तूर है। यह पहला मौका है जब देश इनसे इनके किए का हिसाब मांग रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता दावा कर रहे हैं कि हसन अली के साथ हवाला धंधे में जुड़े राज्य के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम उनके पास हैं। यदि ऐसा है तो उन्हें तत्काल यह पर्दाफाश करना चाहिए। ध्यान रहे, पूरा देश सब देख और सुन रहा है।
Thursday, March 24, 2011
पोल खुलने से हलकान
ऊंची कुर्सियों पर बैठे भ्रष्ट और तिकड़मी, देश की सुरक्षा यहां तक कि इसके अस्तित्व को भी दांव पर लगाने से नहीं चूकते; इसका नंगा खेल हम टू-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले और हवालाबाज हसन अली के मामलों में देख चुके हैं। ऊपर से ये दोनों मामले भले अलग दिखें लेकिन सतह को हल्का खुरचते ही आतंकियों और माफिया सरगनाओं के काले निशान हर जगह दिखने लगते हैं। टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में गिरफ्तार शाहिद बलवा के तार अगर कुख्यात माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम से जुड़े बताए जा रहे हैं तो हसन अली को दुनियाभर के कुख्यात आतंकियों का बैंकर कहा जा रहा है। लेकिन असल चिंता की बात इन दोनों की वह गहरी पैठ है जो इन्होंने देश के सत्ता गलियारे में बना ली थी। शुक्र है कि सजग सुप्रीमकोर्ट और आक्रामक मीडिया के दबाव में बलवा और अली सरीखे तिकड़मी सीखचों के पीछे जा चुके हैं और उनके काले कारनामों के बेनकाब होने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। लेकिन दूसरी ओर एक और खतरनाक खेल शुरू हो गया है जिसमें इन मामलों से माफिया के पदचिह्नों को मिटाने की कोशिश है। खबर है कि दाऊद इब्राहिम सीबीआई के दफ्तर पर हमला बोल कर टू-जी स्पेक्ट्रम महा घोटाले के उन दस्तावेजों को नष्ट करने की फिराक में है जिनके सिरे इस माफिया सरगना तक पहुंचते हैं। खुद सीबीआई को मिली इस जानकारी के बाद उसके मुख्यालय में रखे इन दस्तावेजों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और जांच में लगे लोगों को भी पूरा सतर्क रहने का निर्देश दे दिया गया है। लेकिन एक बात जो साफ दिखाई दे रही है वह है इन माफिया सरगनाओं का दुस्साहस, जो देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के मुख्यालय पर भी हमले की साजिश रचने से नहीं डरते। यह साजिश सादिक बाशा के कथित आत्महत्या के रहस्य को और उलझा देने वाली है। बाशा न केवल स्पेक्ट्रम घोटाले से गहराई से जुड़ा था बल्कि वह पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए. राजा के काले कारनामों का राजदार भी था। घोटाले की रकम को दुबई और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में खपाने की जिम्मेदारी उसी की थी और इस सिलसिले में वह दाऊद जैसे माफिया सरगनाओं के सम्पर्क में बताया जाता था। उसकी 'कथित आत्महत्या' उस वक्त हुई जब वह सीबीआई के बुलावे पर दिल्ली जाने की तैयारी कर रहा था। आत्महत्या के घंटों बाद बरामद दिखाए गए सुसाइड नोट में भी अनेक विसंगतियां थीं। हद तो तब हो गई जब उसकी लाश का पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर खुद शक के घेरे में आ गया। जाहिर है कि महाभ्रष्टाचारों की बांसुरी बजाने वाले देश के तमाम सफेदपोश पोल खुलने के डर से हलकान हैं। स्पेक्ट्रम महाघोटाले में आरोपपत्र दाखिल करने का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है उनकी बदहवासी बढ़ती जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और केंद्र में सचिव जैसे बड़े लोग इस आरोपपत्र के सीधे निशाने बनने जा रहे हैं। तमिलनाडु में सत्तासीन डीएमके के सुप्रीमो करुणानिधि की सांसद बेटी और उनकी उम्रदराज पत्नी आरोपों के घेरे में हैं। देश के सर्वशक्तिमान उद्योगपतियों और व्यापारियों पर आरोपों का शिंकजा कसता जा रहा है। ये सब वही लोग हैं जो लाइसेंस राज में भी कमाते थे और आर्थिक सुधारों की आड़ में भी इनका धंधा बदस्तूर है। यह पहला मौका है जब देश इनसे इनके किए का हिसाब मांग रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता दावा कर रहे हैं कि हसन अली के साथ हवाला धंधे में जुड़े राज्य के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम उनके पास हैं। यदि ऐसा है तो उन्हें तत्काल यह पर्दाफाश करना चाहिए। ध्यान रहे, पूरा देश सब देख और सुन रहा है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment