Thursday, March 24, 2011

राष्ट्रीयकृत बैंकों की भूमिका पर भी उठेगा सवाल


2जी घोटाले के मद्देनजर सीबीआई द्वारा दायर की जाने वाली चार्जशीट पूर्व संचार मंत्री ए. राजा की परेशानी और बढ़ा सकती है। उनके पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया ने सीबीआई से अपने बयान में कहा कि वह सिर्फ अपने आका के निर्देश पर ही फाइल डिस्पोज करते थे। सूत्रों के अनुसार सीबीआई अपनी चार्जशीट में इस बात को जोरशोर से रखने जा रही है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा जिस तरह कुछ कंपनियों को फंडिंग की गई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। सीबीआई अपनी चार्जशीट में यह जिक्र करने वाली है कि इस तरह के अपराध भविष्य में न हों, इसलिए इसमें संलिप्त लोगों के साथ कोई सहानुभूति न बरती जाए। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई इस महीने में 2जी मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल करने वाली है। सीबीआई इस चार्जशीट में चंदोलिया के उस बयान को भी उजागर करने वाली है, जिसमें उसने कहा कि उसका काम था फाइल को अपने वरिष्ठ (राजा) के सामने रखना। उसने सीबीआई को यह भी कहा था कि वह सिर्फ अपने आका के आदेश का पालन करते थे। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने चंदोलिया की स्टेटमेंट को आधार बनाया और उन सुबूतों को इकट्ठा कर लिया है, जिससे यह साबित होगा कि राजा और चंदोलिया का भी इस घोटाले में हाथ था। सीबीआई अपनी चार्जशीट में कई सुबूतों के साथ यह साबित करने जा रही है कि चंदोलिया राजा के आदेशों का पालन करता था। सीबीआई अपनी चार्जशीट में इस बात का भी खुलासा करने जा रही है कि चंदोलिया के कई जगह मना करने के बावजूद भी ऐसे सबूत मिले हैं, जिसमें उसकी (चंदोलिया) की भूमिका थी। उसकी (चंदोलिया की) यूएएस लाइसेंस आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका थी, विशेषकर यूएएस लाइसेंस को स्वीकार करने में। सीबीआई ने सबूत में पाया कि आरके चंदोलिया यूएएस लाइसेंस के आवेदन को स्वीकार करने में काफी 'चूजी' थे और यही कारण रहा कि कुछ ऐसे दस्तावेज स्वीकार किए गए जो फर्जी थे। सूत्रों के अनुसार, पूरी चार्जशीट और ड्राफ्ट चार्जशीट जिसे बृहस्पतिवार को सीबीआई निदेशक के सामने प्रेजेन्टेशन के रूप में दिखाया जाएगा, उसमें इन सब मामलों का जिक्र होगा। इसके अलावा सीबीआई अपनी उस जांच को भी चार्जशीट में उजागर करने वाली है, जिसमें पाया था कि स्वान टेलीकॉम में जिस समय यूएएस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, उस समय वह योग्य पात्र ही नहीं था। जांच में मालूम हुआ कि मेसर्स टाइगर ट्रेडर्स प्रा. लि. का अधिकांश शेयर स्वान में था। जांच में पता चला कि जितने भी टाइगर ट्रेडर्स के पास स्वान के शेयर्स थे, वे अप्रत्यक्ष रूप से अनिल भाई धीरूभाई अंबानी ग्रुप द्वारा फंडेड थे। सीबीआई को जांच में पहले ही पता चल चुका है कि रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड जो एडीएजी ग्रुप की कंपनी है, को पहले ही कुछ सर्किल के लिए लाइसेंस मिल चुका था। इस तरह स्वान टेलीकॉम जो एडीएजी ग्रुप की एसोसिएट कंपनी थी, वह लाइसेंस प्राप्त करने योग्य ही नहीं थी। सीबीआई इस बात की जोर-शोर से जांच कर रही है कि स्वान टेलीकॉम के मालिक शाहिद बलवा के क्या संबंध कुछ हवाला आपरेटर, डी कंपनी और पाकिस्तान एवं श्रीलंका के कुछ संगठनों से तो नहीं हैं। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है, जिसे वह अपनी चार्जशीट में दर्शा सकती है कि लूप टेलीकॉम के कुछ अधिकारियों ने मॉरीशस में भारतीय उच्चायोग से मुलाकात की और सीबीआई द्वारा भेजे गए एलआर की विस्तृत जानकारी मांगी थी।

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