Wednesday, March 30, 2011

कालेधन पर एसआइटी बनाने के पक्ष में नहीं केंद्र


 कालेधन पर विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का विरोध करने के लिए सरकार को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा। शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआइटी इसलिए जरूरी है क्योंकि तीन साल से चल रही जांच में शामिल एजेंसियों ने धन के स्रोत की जांच नहीं की। न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और एस एस निज्जर की पीठ ने जांच को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए कहा, हम बुनियादी सवाल (धन का स्रोत) जानना चाह रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसियों के पास इसका जवाब नहीं है। पीठ ने कहा, जिस तरीके से साल 2008 से जांच आगे बढ़ी है, उससे स्पष्ट होता है कि इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 2008 से आपको पता है कि कुछ लोगों ने विदेश में कालाधन छिपा रखा है, लेकिन उसकी जांच के बदले आपने दोहरे कराधान संधि और इस संधि और उस संधि की बात की। आप उन लोगों से सरल सवाल पूछ सकते थे कि आपने यह धन कहां से हासिल किया जिसका आपने अब तक जवाब नहीं दिया। पीठ ने कहा कि ईडी कई बार स्टेटस रिपोर्ट सौंप चुका है, लेकिन किसी में भी धन के मूल स्रोत का जिक्र नहीं है। पीठ में से एक जज ने ईडी की ओर से सोमवार को दाखिल स्टेटस रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, मैंने पूरी रात रिपोर्ट पढ़ी, लेकिन उससे कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि आपने धन का स्रोत पता लगाने के लिए कुछ किया है। रिपोर्ट में तीन-चार सवाल जरूर उठाए गए हैं, लेकिन धन के स्रोत पर कुछ नहीं कहा गया। पीठ ने कहा, कालेधन के आरोपी कोई विदेशी नहीं हैं। वे सभी यहीं हैं, लेकिन पिछले तीन सालों में आपने कुछ नहीं किया। पीठ ने याचिकाकर्ता और वरिष्ठ वकील राम जेठ मलानी के उन आरोपों पर भी विचार किया जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा हसन अली की सीडी बनाने वाले पुलिस अधिकारी को सस्पेंड करने की बात कही थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 8 अप्रैल से पहले सीडी को उसके समक्ष पेश किया जाए|

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