Friday, March 18, 2011

नोटों से भरी तिजोरियां किसके लिए थीं


अमेरिका के साथ परमाणु करार पर विश्र्वास मत का सामना कर रही सरकार ने वोटों का जुगाड़ करने के लिए किस तरह के नोटों का खेल किया था, इसके बारे में विकिलीक्स ने कई सनसनीखेज रहस्योद्घाटन किए हैं। इस वेबसाइट ने भारत में अमेरिकी दूतावास से वहां के विदेश मंत्रालय को भेजे गए केबल के जरिए बताया है कि लोकसभा में विश्र्वास मत हासिल करने के लिए अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के चार सांसदों को दस-दस करोड़ रुपये दिए गए थे। कांग्र्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी राज्यसभा सदस्य कैप्टन सतीश शर्मा के सहयोगी नचिकेता कपूर ने अमेरिकी दूतावास के एक राजनयिक को विश्र्वास मत से पांच दिन पहले सांसदों को खरीदे जाने की बात बताई थी। उस राजनयिक को इस बात पर यकीन हो इसके लिए कपूर ने नोटों से भरी दो तिजोरियां दिखाते हुए कहा था कि पार्टी ने महत्वपूर्ण विश्र्वास मत को जीतने के लिए करीब 60 करोड़ रुपये के फंड का इंतजाम किया है। उस राजनयिक ने सतीश शर्मा से भी मुलाकात की। अमेरिकी दूतावास के प्रभारी राजदूत स्टीवन व्हाइट द्वारा भेजे गए केबल के अनुसार शर्मा ने कहा था कि 22 जुलाई को सरकार को विश्र्वास में जिताने के लिए पार्टी में उनके साथ कई नेता कड़ी मेहनत कर रहे हैं और वोटों का इंतजाम करने के लिए भाजपा और अकाली दल के सांसदों से भी संपर्क किया गया है। अकाली दल के सांसदों के पटाने के लिए संत चटवाल को मध्यस्थ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि भाजपा को विभाजित करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य को लगाया गया है। शर्मा ने कहा था कि प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी और राहुल गांधी परमाणु करार को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। कोशिश हुई कि शिव सेना को मतदान से गैरहाजिर रहने के लिए मना लिया जाए|

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