Saturday, February 5, 2011

2जी स्पेक्ट्रम : पहले राजग फिर राजा ने तोड़े नियम


दूरसंचार कंपनियों को 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन कभी भी नियमों के अनुसार नहीं हुआ। वर्ष 2003 के बाद से जितने भी 2जी लाइसेंस दिए गए, उनमें नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कोताही नहीं बरती गई। राजग सरकार के दूरसंचार मंत्रियों ने अगर अपने ही कैबिनेट के फैसले को दरकिनार किया तो मौजूदा संप्रग सरकार भी लगभग सात वर्षो तक इन गड़बडि़यों को नजरअंदाज करती रही। ये कुछ तथ्य हैं जिन्हें 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर गठित एक सदस्यीय न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति की रिपोर्ट में सामने लाया गया है। शुक्रवार को संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने पाटिल समिति की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी सार्वजनिक की। सिब्बल का रवैया इस रिपोर्ट के जरिए सच सामने लाने से ज्यादा 2जी घोटाले पर विपक्षी दलों को जवाब देने का था। उन्होंने कहा, 2जी स्पेक्ट्रम पर संयुक्त संसदीय दल (जेपीसी) से जांच करने की मांग करने वाले विपक्षी दलों को राजग सरकार के संचार मंत्रियों की गतिविधियों की भी जांच करवाने की मांग करनी चाहिए। राजा ने राजग के कार्यकाल में जारी नीतियों को ही लागू किया। यह अलग बात है कि राजग ने गलत नीति लागू की थी। रिपोर्ट का हवाला देते हुए सिब्बल ने बताया कि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने वर्ष 2003 में कहा था कि लाइसेंस और स्पेक्ट्रम अलग-अलग होने चाहिए फिर भी उसका पालन नहीं किया गया। न तो राजग कार्यकाल में और न ही संप्रग में इस पर ध्यान दिया गया। इसी तरह से पहले आओ, पहले पाओ संबंधी नियम का उल्लंघन पहली बार राजग ने वर्ष 2003 में किया। बाद में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने भी 2007-08 में उल्लंघन किया। राजग पर आरोप लगाने के बावजूद सिब्बल के पास इस बात का जवाब नहीं था कि संप्रग सरकार लगभग पांच वर्षो तक राजग के दौर की गड़बडि़यों को क्यों दोहराती रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2003 से ही दूरसंचार लाइसेंस देने में पारदर्शिता नहीं बरती गई। समिति ने वर्ष 2001 से वर्ष 2009 के बीच 17 ऐसे मामले बताए हैं जहां दूरसंचार लाइसेंस देने या स्पेक्ट्रम आवंटन करने में तयशुदा नियम-कानून को तोड़ा गया। इस दौरान 16 मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। 25 मामलों में सही आवेदन नहीं होने और तयशुदा प्रक्रिया से बाहर जाकर लाइसेंस दिए गए। इसमें मंत्रियों, सचिवों व अन्य सरकारी अधिकारियों की भूमिका अहम रही। कपिल सिब्बल से जब यह पूछा गया कि दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी तो उनका जवाब था कि हमने रिपोर्ट सीबीआइ को सौंप दी है। अब उसे तय करना है कि अगर किसी के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है तो वह उचित कार्रवाई करे.

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