Friday, February 4, 2011

ए. राजा पर भारी पड़ी सीबीआइ की दलील


बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में ए.राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और संचार मंत्री के तत्कालीन निजी सचिव आर.के. चंदौलिया को बृहस्पतिवार को यहां सीबीआइ कोर्ट में पेश किया गया। वहां बचाव व अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है। सरकारी वकील ने कोर्ट में तीनों के खिलाफ अलग-अलग अर्जी दायर करते हुए पांच दिनों की सीबीआइ रिमांड की मांग की। दलील दी गई कि राजा सहित तीनों आरोपी बहुत प्रभावशाली हैं। घोटाले में आपराधिक षड्यंत्र साफ तौर पर दिखा है। उन्हें जेल भेजा गया तो वे इससे जुड़े तमाम गवाहों और सुबूतों को मोड़ सकते हैं और उससे छेड़छाड़ कर सकते हैं। इस पर एतराज जताते हुए बचाव पक्ष के वकील ने सीबीआइ द्वारा दर्ज एफआइआर को ही गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के मामला दर्ज करना ही गलत था। इस मामले की शिकायत किसी ने सीबीआइ से नहीं की है। सीबीआइ ने खुद ही मामला दर्ज किया है। वकील ने इस दौरान कोर्ट को बताया कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में सिर्फ ए. राजा ही नहीं बल्कि कई और लोग शामिल हैं। बचाव पक्ष के वकील के अनुसार 2जी स्पेक्ट्रम की दर वर्ष 2001 में तय की गई थीं। इसमें राजा का क्या दोष है? सीबीआइ के पास अभी तक कोई साक्ष्य नहीं है। गिरफ्तारी से पहले भी राजा से चार बार पूछताछ हो चुकी है। राजा ने पूरा सहयोग किया है। पांच दिन की रिमांड मांगकर सीबीआइ क्या हासिल करना चाहती है। 2जी स्पेक्ट्रम की जो भी फाइल थी उसे वर्ष 2009 में ही जब्त किया जा चुका है। इसमें घोटाला कुछ भी नहीं है, सभी बातें काल्पनिक हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने आधे घंटे बाद अपना फैसला सुनाने की बात कही। आधे घंटे बाद जज ने तीनों को पांच दिन की रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। साथ ही बेहुरा को अपोलो अस्पताल में भर्ती अपनी पत्नी से ऑपरेशन से पहले और बाद मिलने की इजाजत दी।


No comments:

Post a Comment