आखिरकार 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के तीन साल बाद सीबीआइ ने बुधवार को पूर्व संचार मंत्री ए. राजा को गिरफ्तार कर लिया है। राजा के साथ ही उनके तत्कालीन निजी सहायक आरके चंदोलिया और तत्कालीन संचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा को भी गिरफ्तार किया गया है। इन तीनों के गुरुवार को पटियाला हाउस अदालत में पेश कर सीबीआइ पुलिस रिमांड में लेने की कोशिश करेगी, ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। इस पूरे घोटाले की सुप्रीम कोर्ट निगरानी कर रही है। सीबीआइ को 10 फरवरी को अदालत के सामने जांच की प्रगति की रिपोर्ट देनी है। सीबीआइ ने राजा की गिरफ्तारी का समय सोच-विचार कर तय किया है। सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे के अनुसार सीबीआइ को 31 मार्च तक जांच पूरी करनी है। वैसे सीबीआइ की तैयारी 31 मार्च से पहले आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की है। नियम के मुताबिक गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद आरोपियों को तकनीकी आधार पर जमानत नहीं मिल सकती है। जाहिर है सीबीआइ राजा को लंबे समय तक जेल में रखने की पूरी तैयारी कर चुकी है। दैनिक जागरण ने 26 दिसंबर को खबर दी थी कि राजा की गिरफ्तारी का फैसला सीबीआइ ले चुकी है और केवल 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा से बंधी होने के कारण वह समय से पहले उसे गिरफ्तार नहीं कर रही है। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजा के साथ ही बेहुरा और चंदौलिया न सिर्फ स्पेक्ट्रम घोटाले की साजिश में शामिल थे, बल्कि सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इसी कारण इन दोनों को भी गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया। दरअसल राजा ने दूरसंचार मंत्री रहते हुए कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए तमाम नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने न सिर्फ स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन की तारीख एक हफ्ते पहले खिसका कर कई कंपनियों को आवेदन करने से वंचित कर दिया, बल्कि पसंदीदा कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाने की सूचना भी लीक कर दी। यही कारण है कि इनमें कई कंपनियों ने तो स्पेक्ट्रम आवंटन की आधिकारिक घोषणा के पहले ही स्पेक्ट्रम के लिए दी जाने वाली फीस का बैंक ड्राफ्ट भी बनवा लिया था। सुप्रीम कोर्ट में घोटाले के आरोपी राजा के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाने वाले सुब्रह्मण्यम स्वामी ने गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए कहा कि अभी जांच एजेंसी को अन्य आरोपियों के खिलाफ काफी कुछ करना बाकी है। सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सीबीआइ की जांच में तेजी आई थी और ए. राजा को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment