राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण का ठेका लंदन की एसआइएस कंपनी को देने के मामले में प्रसार भारती नई मुसीबत में फंस गया है। इस मामले में विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के उल्लंघन का केस दर्ज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रसार भारती को नोटिस भेज दिया है। उच्चस्तरीय शुंगलू समिति पहले ही इसके लिए प्रसार भारती के तत्कालीन सीईओ बीएस लाली और महानिदेशक अरुणा शर्मा को जिम्मेदार ठहरा चुकी है। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से यह सीधे तौर पर फेमा उल्लंघन का मामला लग रहा है क्योंकि प्रसार भारती ने विदेशी मुद्रा में एसआइएस को किए गए लगभग 146 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए रिजर्व बैंक से पूर्व अनुमति नहीं ली थी, जबकि प्रसार भारती को विदेशी मुद्रा में केवल 20 लाख डॉलर तक भुगतान करने की अनुमति है। ईडी ने प्रसार भारती को नोटिस भेजकर एसआइएस को दिए गए ठेके और किए गए भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेज दो हफ्ते के भीतर देने को कहा है। साथ ही प्रसार भारती को विदेशी मुद्रा में भुगतान के लिए रिजर्व बैंक से ली गई अनुमति की प्रति भी देने को कहा गया है। प्रसार भारती के सीईओ रहते हुए बीएस लाली ने राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण के ठेका 246 करोड़ रुपये में एसआइएस कंपनी को दे दिया था, लेकिन जिस दिन एसआइएस को यह ठेका मिला, उसी दिन एसआइएस ने इसे 170 करोड़ रुपये में जूम कम्यूनिकेशन को दे दिया। बाद में खेलों के प्रसारण के दौरान जूम कम्यूनिकेशन के खर्च के ब्योरे की जांच के आधार पर शुंगलू समिति ने कहा कि यह काम 100 करोड़ रुपये से भी कम का था। इस मामले में शुंगलू समिति ने लाली और अरुणा शर्मा समेत एसआइएस व जूम कम्यूनिकेशन के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश की है.
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