विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कठघरे में खड़ी मनमोहन सरकार के लिए अच्छी खबर है। स्विट्जरलैंड और जर्मनी ने अपने यहां जमा काले धन का पता लगाने में भारत सरकार की मदद करने का वादा किया है, लेकिन साथ ही यह शर्त भी लगा दी है कि साझा की गई जानकारी गुप्त मानी जाएगी और भारत सरकार किसी भी कीमत पर काला धन जमा करने वालों का नाम सार्वजनिक नहीं करेगी। दोनों देशों का कहना है कि भारत को उनके यहां के बैंकिंग गोपनीयता कानून का कड़ाई से पालन करना होगा। जर्मन वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने बर्लिन से फोन पर बताया कि हम काला धन जमा कराने वाले और भारतीयों का नाम बताने के लिए तैयार है। बशर्ते जानकारी गोपनीय रखी जाए। पिछले वर्ष जर्मनी ने लीकटेंस्टाइन स्थित एलजीटी बैंक में गोपनीय खाते रखने वाले कुछ लोगों के नाम भारत सरकार को बताए थे। प्रवक्ता के अनुसार, जर्मनी का फेडरल ब्यूरो ऑफ टैक्सेज समय-समय पर प्रासंगिक जानकारी उन देशों को उपलब्ध कराता रहता है, जिनके यहां के लोगों का गोपनीय खाता जर्मनी के बैंकों में खुला होता है। प्रवक्ता ने साथ ही यह भी कहा कि इस तरह की जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। इनका इस्तेमाल केवल संबद्ध देश के सक्षम अधिकारी ही कर सकते हैं। कुछ इसी तरह की बात स्विस वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी बर्न से फोन पर कही। उसका कहना था कि संशोधित कर संधि के प्रभावी हो जाने के बाद स्विट्जरलैंड के बैंकों में काला धन जमा करने वालों के बारे में जो भी जानकारी भारत को दी जाएगी, वह गोपनीय मानी जाएगी। भारत सरकार उसे सार्वजनिक नहीं कर सकती। प्रवक्ता के अनुसार, खाताधारकों के बारे में जानकारी केवल कोर्ट और उन्हीं प्रशासनिक अधिकारियों के इस्तेमाल के लिए होगी, जो अभियोजन और जांच की प्रक्रिया से संबद्ध हैं। काला धन जमा करने वालों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मौजूदा कर संधि में संशोधन किया जा रहा है। यह संशोधन प्रभावी हो जाने के बाद भारत की पहुंच गोपनीय स्विस बैंक खातों तक हो सकेगी।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment