काले धन पर जानकारी हासिल करना भारत के लिए अब कुछ आसान हो सकता है। स्विट्जरलैंड ने विदेशियों के गुप्त बैंक खातों के बारे में सूचनाएं साझा करने से संबंधित नियम मंगलवार को कुछ नरम कर दिए। इसके तहत खाता धारकों की पहचान के लिए अब विभिन्न तरीके होंगे। हालांकि स्विट्जरलैंड ने साफ किया है कि दूसरे देशों को उसके यहां खातों को खंगालने की अनुमति अब भी नहीं होगी।
फिलहाल कर चोरी के संदिग्ध किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए उसका नाम और पता स्विस अधिकारियों को देना होता है। इसके अलावा उसके बैंक के बारे में जानकारी भी देनी होती है। लेकिन नियमों में नरमी के बाद अब पहचान के अन्य तरीके भी मान्य होंगे। हालांकि स्विस सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि यह अन्य तरीके क्या हैं। स्विस सरकार के वित्त विभाग ने सिर्फ इतना ही कहा कि बैंक खाते के जरिए पहचान करना भी एक संभावना हो सकती है। यह नए नियम लागू करने के लिए स्विट्जरलैंड और अन्य देशों के बीच दोहरा कराधान संधि में भी संशोधन करना होगा।
दोहरा कराधान संधि पर भारत और स्विस सरकार के बीच अभी बातचीत ही चल रही है। इसमें तय किया जा चुका है कि भारत को किसी संदिग्ध कर चोर के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए व्यक्ति का नाम और पता ही नहीं, बल्कि बैंक के बारे में बताना पड़ेगा। मालूम हो कि केंद्र सरकार को काले धन के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा उसे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आलोचना भी सहनी पड़ रही है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि विदेश में अवैध तरीके से पैसा जमा करने वालों पर क्या कार्रवाई की जा रही है।

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