Friday, February 18, 2011

विवादित एंट्रिक्स-देवास करार खत्म


संसद सत्र से पहले विवादों की आंच धीमी करने की कवायद में सरकार ने आखिर देवास मल्टीमीडिया और इसरो के वाणिज्यिक उपक्रम एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड के करार को खत्म करने का फैसला कर लिया है। मामले पर प्रधानमंत्री की ओर से आए आश्वासन के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी मामलों की समिति (सीसीएस) ने रणनीतिक क्षेत्र की स्पेक्ट्रम जरूरतों के मद्देनजर निजी कंपनी के साथ हुए अनुबंध को रद करने का निर्णय किया। हालांकि दोषियों पर कार्रवाई के लिए सरकार फिलहाल मामले की जांच कर रही चतुर्वेदी समिति की रिपोर्ट का इंतजार करेगी। प्रधानमंत्री की अगुवाई में हुई सीसीएस की बैठक के बाद मीडिया से रू-ब-रू केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि सरकार ने सभी संभावनाओं को तौलने के बाद यह फैसला लिया है कि बेहद कीमती एस-बैंड स्पेक्ट्रम किसी निजी कंपनी को तो दूर, एंट्रिक्स कारपोरेशन को भी वाणिज्यिक उपयोग के लिए नहीं दिया जा सकता। मोइली का कहना था कि रक्षा सेनाओं, अ‌र्द्धसैनिक बलों, रेलवे और सार्वजनिक हित से जुड़े कई उपक्रमों की जरूरत के मद्देनजर सरकार एंट्रिक्स को ऑरबिट स्लॉट नहीं मुहैया करा सकती। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि सेनाओं की जरूरत वाले इस स्पेक्ट्रम को देने से पहले रक्षा मंत्रालय से सलाह-मशविरा नहीं किया गया। सरकार के इस फैसले के बाद अब विवाद के अदालत में जाने की संभावना पुख्ता हो गई है। हालांकि फिलहाल देवास की ओर से इतना ही कहा गया है कि कंपनी को इस फैसले पर किसी औपचारिक सूचना का इंतजार है। वैसे देवास करार खत्म करने के फैसले को अदालत में ले जाने की बात पहले ही कह चुकी है। अनुबंध को तोड़ने के कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए ही सीसीएस में कानून मंत्री को भी बुलाया गया था। हालांकि मोइली ने भरोसा जताया कि मामला अदालत में जाता है तो भी सरकार ही जीतेगी। अनुबंध तोड़ने के लिए देवास और एंट्रिक्स के बीच जनवरी 2005 में हुए करार के अनुच्छेद 7 (सी) का सहारा लिया गया। इसमें कहा गया था कि एंट्रिक्स यदि सरकार से स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए एस-बैंड स्लॉट हासिल करने में नाकाम रहती है तो करार खत्म हो सकता है। सूत्रों के अनुसार सीसीएस की राय थी कि करार को परवान चढ़ाने के लिए एंट्रिक्स ने अपनी हदें पार कीं। साथ ही उपग्रह मंजूरी हासिल करने के दौरान कई तथ्य भी छुपाए गए। हालांकि मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई से पहले सरकार पूर्व कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी की अगुवाई वाली दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। देवास-एंट्रिक्स करार पर मचे बवाल के बाद बनाई गई इस समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। 2009 में इसरो की ओर से शुरू की गई करार की समीक्षा के बाद अंतरिक्ष आयोग ने जुलाई 2010 में हुई बैठक में इस समझौते को खत्म करने का फैसला किया था। सीएजी के सवालों और उसके बाद उठे विवाद के बाद अंतरिक्ष आयोग की बैठक में सरकार ने एंट्रिक्स में ढांचागत सुधार कर भविष्य में ऐसे किसी अनुबंध की संभावना खत्म कर दी है।


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