स्पेक्ट्रम घोटाले में ए. राजा की गिरफ्तारी के बाद अब तक उनका बचाव कर रही सरकार उलझती दिखाई दे रही है। पहले थॉमस और अब राजा के मामले ने सरकार के सुरक्षा कवच को ही तार-तार कर दिया है। कैग की जिस रिपोर्ट को खारिज कर सरकार का सुरक्षा कवच राजा को पाक साफ बताने में जुटा था सीबीआइ ने उसी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार उलझ रही है। पहले थॉमस का बचाव किया तो सुप्रीम कोर्ट में खुद थॉमस का हलफनामा ही सरकार के लिए मुसीबत बन गया। अब राजा के मामले में भी सरकार की किरकिरी हो गई है। स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए टेलीकॉम नीति के समर्थन में सरकार ने मौजूदा संचार मंत्री कपिल सिब्बल को उतारा था। सिब्बल ने कैग की रिपोर्ट को ही पूरी तरह खारिज करते हुए राजा की बात को दोहराया था। सिब्बल ने यहां तक कह दिया था कि स्पेक्ट्रम बेचने से हुए नुकसान का कैग का आकलन ही गलत था, लेकिन राजा की गिरफ्तारी ने सिब्बल के सभी तर्को को गलत साबित कर दिया है। राजा की गिरफ्तारी कैग की उसी रिपोर्ट के आधार पर हुई है जिसे सिब्बल खारिज कर रहे थे। राजा की गिरफ्तारी से इस मामले में सरकार का सुरक्षा कवच बिखर गया है। मंगलवार को ही थॉमस के मामले में ऐसा ही देखने को मिला था। थॉमस के मामले में भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि चयन के वक्त समिति को नहीं मालूम था कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है। लेकिन विपक्ष की आलोचना के बाद अगले ही दिन चयन समिति के सदस्य रहे गृहमंत्री पी चिदंबरम ने साफ किया कि समिति के सामने थॉमस की जांच को लेकर चर्चा हुई थी। अब इस मसले पर सरकार को संसद के आगामी सत्र में भी इस मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
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