देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे.एस. वर्मा ने सगे-संबंधियों के भ्रष्टाचार को लेकर विवादों में घिरे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष के.जी. बालाकृष्णन से इस्तीफे की मांग की है। वर्मा ने कहा, भ्रष्टाचार मानवाधिकार उल्लंघन का सबसे खराब रूप है। बाला को एनएचआरसी प्रमुख के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर वह त्यागपत्र नहीं देते हैं तो राष्ट्रपति को उन्हें पद से हटाने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। वर्मा ने आयकर विभाग द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, भ्रष्टाचार मानवाधिकार उल्लंघन का सबसे खराब रूप है। मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन का आरोपी अगर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अध्यक्षता करता है तो यह अपने आप में न्याय का बड़ा मजाक है। मेरा मानना है कि उन्हें (बाला) इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर उनके अनुसार, आरोप सही नहीं हैं तो यह उनका दायित्व है कि वह उन्हें गलत साबित करें। अगर उन्होंने मौन रहने का विकल्प चुना है और खुद को बेदाग नहीं साबित किया है तो हटाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि अगर वह इस्तीफा देने से इंकार करते हैं तो वर्मा ने कहा, उस स्थिति में राष्ट्रपति को कार्रवाई करने के लिए बढ़ना चाहिए। आखिरकार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए प्रावधान है। उन्होंने कहा, वह(बालकृष्णन) एनएचआरसी अध्यक्ष बने हुए हैं। उनकी बातों का कोई भरोसा नहीं है। सुप्रीमकोर्ट के पूर्व जज कृष्णा अय्यर पहले ही बाला पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग के महानिदेशक (जांच) ई टी लुकोसे ने शनिवार को कोच्चि में पत्रकारों से कहा था कि बालाकृष्णन के परिजनों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की जांच में उनके तीन रिश्तेदारों के पास काला धन पाया गया। लुकोसे ने कहा था कि बालकृष्णन के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते, लेकिन उनके दो दामादों वी श्रीनिजन और एम जे बेन्नी (दोनों अधिवक्ता)और भाई केजी भास्करन का सवाल है तो हमने उनके पास काला धन पाया है|
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