पूर्व संचार मंत्री ए. राजा पर शिकंजा कसने में सीबीआइ को भले ही सफलता मिल गई हो, लेकिन कारपोरेट लॉबिंग करने वाली नीरा राडिया के खिलाफ सबूत जुटाना उसके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। सीबीआइ को अभी तक 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में राडिया के शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि ए. राजा को संचार मंत्री बनाने के लिए राडिया लॉबिंग कर रही थी। दैनिक जागरण से सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राडिया की बातचीत के 5800 से अधिक टेपों की पूरी पड़ताल कर ली गई है, लेकिन उनमें 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से राडिया की सीधी भूमिका का संकेत नहीं मिला है। उनके अनुसार राडिया की बातचीत के कुछ टेपों में करोड़ों के लेनदेन का जिक्र जरूर है और इस संबंध में उनसे विस्तार से पूछताछ की जा चुकी है। सीबीआइ राडिया की इन दलीलों की कोई पुख्ता काट नहीं जुटा पा रही है कि यह लेनदेन कॉरपोरेट बिजनेस के सिलसिले में है और इसका घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है। सीबीआइ के अधिकारियों का कहना है कि राडिया की बातचीत के टेप भी मई 2009 के बाद के हैं जब यूपीए-2 सरकार बन रही थी। जबकि 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन 10 जनवरी 2008 में ही पूरा हो चुका था। जाहिर है आवंटन के लगभग डेढ़ साल बाद की बातचीत के रिकार्ड से कोई सीधा संबंध जोड़ना वैसे भी दूर की कौड़ी है। वहीं सीबीआइ अधिकारी यह भी मानते हैं कि ए. राजा को मंत्री बनाए जाने के लिए लॉबिंग को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की दायरे में अपराध साबित करना मुमकिन नहीं है। साथ ही टाटा समूह को स्पेक्ट्रम का आवंटन न होना भी राडिया के लिए बड़ी ढाल साबित हो रहा है। जांच पर नजर रख रहे वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि बातचीत के लगभग 60 टेपों में 2जी स्पेक्ट्रम से जुड़ी कंपनियों का जिक्र आया है, लेकिन इसे घोटाले से जोड़ा नहीं जा सका है। हालांकि फिलहाल सीबीआइ मामले में राडिया को सीधे क्लीन चिट देने के भी मूड में नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि जांच जारी है और हिरासत में राजा से जारी पूछताछ के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
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