लखनऊ। विधान परिषद में आज शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का मामला शिक्षक दल ने उठाकर सरकार को घेरा। सरकार ने शिक्षक दल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा विभाग से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।
शून्यकाल में शिक्षक दल लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर बोलते हुए ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग के कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण शिक्षकों का चयन, मासिक वेतन, जीपीएफ से ऋण, जीपीएफ से अंतिम निष्कासन, मृतक आश्रित की अनुकम्पा नियुक्ति, पदोन्नति के प्रकरण, ज्येष्ठता निर्धारण के प्रकरण और प्रबंधकीय विवादों के मामलों में भारी लेन-देन एक दैनिक प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यह है कि शासन द्वारा शिक्षकों के वेतन के लिए जारी 10 अरब रुपए के ग्रांट को शिक्षा विभाग ने जारी की है। बाकी चार अरब रुपए की ग्रांट रोक ली है। इससे शिक्षा विभाग को भ्रष्टाचार करने का मौका मिल गया है। सरकार का पक्ष रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। नकल माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक नीति बनाई गई है। इस नीति की निगरानी करने के लिए अलग से वृंदास्वरूप कमेटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही वित्तविहीन कॉलेजों का परीक्षा केंद्र राजकीय विालयों में बनाने की कार्रवाई की गई है। छात्रों के पंजीकरण की तिथि 15 जुलाई निर्धारित कर दी गई है। साथ ही 31 जुलाई तक सभी विालयों को पंजीकरण की रिपोर्ट देने के निर्देश हैं। जिससे विालयों के प्रबंधक फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकें। श्री मिश्र ने कहा कि ग्रांट रोकने के मामले की जांच होगी। इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निदेशालय को निर्देश दिए जा चुके हैं कि ग्रांट को सीधे जिलों को भेजा जाए। इसमें देरी होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि चयन बोर्ड द्वारा चयनित शिक्षकों को अगर प्रबंधक ज्वाइनिंग कराने में समस्या पैदा करते हैं तो डीवाईएस अपने यहां ज्वाइंन कराएगा। इसके साथ ही प्रबंध तंत्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने चयन बोर्ड से नियुक्ति शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया है। इसकेसाथ ही उन्होंने कहा कि मृतक आश्रित की अनुकम्पा नियुक्ति एक माह के अंदर सुनिश्चित कराई जाएगी।
शून्यकाल में शिक्षक दल लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर बोलते हुए ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग के कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण शिक्षकों का चयन, मासिक वेतन, जीपीएफ से ऋण, जीपीएफ से अंतिम निष्कासन, मृतक आश्रित की अनुकम्पा नियुक्ति, पदोन्नति के प्रकरण, ज्येष्ठता निर्धारण के प्रकरण और प्रबंधकीय विवादों के मामलों में भारी लेन-देन एक दैनिक प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यह है कि शासन द्वारा शिक्षकों के वेतन के लिए जारी 10 अरब रुपए के ग्रांट को शिक्षा विभाग ने जारी की है। बाकी चार अरब रुपए की ग्रांट रोक ली है। इससे शिक्षा विभाग को भ्रष्टाचार करने का मौका मिल गया है। सरकार का पक्ष रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। नकल माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक नीति बनाई गई है। इस नीति की निगरानी करने के लिए अलग से वृंदास्वरूप कमेटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही वित्तविहीन कॉलेजों का परीक्षा केंद्र राजकीय विालयों में बनाने की कार्रवाई की गई है। छात्रों के पंजीकरण की तिथि 15 जुलाई निर्धारित कर दी गई है। साथ ही 31 जुलाई तक सभी विालयों को पंजीकरण की रिपोर्ट देने के निर्देश हैं। जिससे विालयों के प्रबंधक फर्जीवाड़ा नहीं किया जा सकें। श्री मिश्र ने कहा कि ग्रांट रोकने के मामले की जांच होगी। इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निदेशालय को निर्देश दिए जा चुके हैं कि ग्रांट को सीधे जिलों को भेजा जाए। इसमें देरी होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि चयन बोर्ड द्वारा चयनित शिक्षकों को अगर प्रबंधक ज्वाइनिंग कराने में समस्या पैदा करते हैं तो डीवाईएस अपने यहां ज्वाइंन कराएगा। इसके साथ ही प्रबंध तंत्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन ने चयन बोर्ड से नियुक्ति शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया है। इसकेसाथ ही उन्होंने कहा कि मृतक आश्रित की अनुकम्पा नियुक्ति एक माह के अंदर सुनिश्चित कराई जाएगी।

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