Sunday, February 20, 2011

घोटाला खुला तो याद आई इनसैट समन्वय समिति


अंतरिक्ष प्रशासन में भारी घोटाले और फजीहत के बाद सरकार को उन व्यवस्थाओं की याद आ रही है जो इस प्रतिष्ठित विभाग पारदर्शी रखने के लिए बनी थीं। एंट्रिक्स कारपोरेशन -देवास करार को रद करने के साथ ही सरकार ने 33 साल पुरानी इनसैट कोआर्डिनेशन कमेटी को सक्रिय करने का निर्णय किया है। अचरज की बात है कि पिछले सात साल से इस समिति की कोई बैठक नहीं हुई है। इस दौरान चंद्रयान सहित करीब आधा दर्जन बड़े उपग्रह छोड़े जा चुके हैं। सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति को एंट्रिक्स-देवास करार रद करने की करीब बीस पेज की सिफारिश अंतरिक्ष विभाग के कामकाज में कई गहरी अपारदर्शिताओं की तरफ इशारा करती है। यह दस्तावेज बताता है कि इनसैट समन्वय समिति की बैठक 2004 के बाद से नहीं हुई है। 1977 में बनी इनसैट समिति ने सिफारिश की थी कि किसी गैर सरकारी उपयोगकर्ता को इनसैट की क्षमता पर एकाधिकार नहीं दिया जाएगा, लेकिन देवास के साथ करार में एंट्रिक्स ने उपग्रह की 90 फीसदी क्षमता देवास को दे दी और वह भी उपग्रह के सक्रिय रहने की पूरी अवधि तक। इनसैट समन्वय समिति सचिवों का समूह था जिसे इनसैट प्रणाली के उपग्रहों के समेकित प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इनसैट क्षमताओं का उपयोग करने वाले सभी विभाग मसलन दूरसंचार, रक्षा, मौसम आदि इस समिति के सदस्य थे। शायद इसकी निष्कि्रयता के चलते ही एंट्रिक्स देवास करार के बारे में रक्षा मंत्रालय अंधेरे में रहा, जैसा कि खुद रक्षा मंत्री कह चुके हैं। ताजे विवाद के बाद यह समिति फिर सक्रिय की जा रही है साथ ही सरकार ने एंट्रिक्स के पुनर्गठन के फैसला भी किया है।


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