Saturday, February 5, 2011

टेढ़ी खीर होगा आदर्श इमारत को गैरकानूनी साबित करना


मुंबई के आदर्श सोसाइटी घोटाले में भले ही सीबीआइ ने एक पूर्व मुख्यमंत्री सहित 13 लोगों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर लिया हो, लेकिन इस इमारत के निर्माण को गैरकानूनी सिद्ध कर पाना उसके लिए भी टेढ़ी खीर साबित होगा। क्योंकि इसके निर्माण में राज्य के आला अधिकारियों का आला दिमाग लगा है। आदर्श मामले को लेकर बांबे हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान विगत एक फरवरी को मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने अपना शपथपत्र देकर कहा है कि सोसाइटी के सारे कागजात सही और वैध पाए गए थे, इसलिए हमने उसे अधिकार प्रमाण पत्र (ओसी) प्रदान किया था। लेकिन बाद में राज्य सरकार के दबाव में यह ओसी वापस लेना पड़ा। एमएमआरडीए ने आदर्श घोटाला उजागर होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण के निर्देश पर उक्त ओसी वापस लिया था। आदर्श सोसाइटी मामले में सब कुछ वैध होने का प्रमाणपत्र न सिर्फ एमएमआरडीए द्वारा दिया गया है, बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी संस्थाओं ने भी इसे अपने-अपने स्तर पर पुख्ता प्रमाण पत्र दे रखे हैं, जिनका तोड़ निकाल पाना लगभग नामुमकिन होगा। भूखंड के मालिकाना हक, भूखंड के आवासीय आरक्षण, चटाई क्षेत्र, भूखंड पर निर्माण के लिए तीन बार दी गई निर्माण अनुमति, 70 मीटर से अधिक ऊंची इमारत के लिए आवश्यक हाई राइज कमेटी का अनापत्ति प्रमाण पत्र, अग्निशमन दल, नौसेना, बेस्ट एवं मुंबई महानगरपालिका सहित कई और विभागों एवं संस्थाओं के अनापत्ति प्रमाण पत्र इस सोसाइटी ने विधिवत् प्राप्त करने के बाद ही 31 मंजिली इमारत का निर्माण किया है। यहां तक कि इस इमारत को गिराने का ऐलान कर चुके केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को मुंह चिढ़ाता 18 अप्रैल, 2003 का वह प्रमाण पत्र भी सोसाइटी के पास है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा उसे तटीय नियमन क्षेत्र (सीआरजेड) संबंधी मंजूरी दी गई है.

No comments:

Post a Comment