नोएडा दिल्ली-नोएडा-डायरेक्ट (डीएनडी) की टोल ब्रिज कंपनी प्राधिकरण को 31 अरब रुपये का चूना लगा चुकी है। यह खुलासा वर्ष 2007 की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ था। समिति ने अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को 2008 में दे दी थी, लेकिन प्राधिकरण कार्रवाई की जगह कुंडली मारे बैठे रहा। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2004 में यूपी सरकार के तत्कालीन औद्योगिक सचिव ने प्राधिकरण को पत्र भेज टोल कंपनी से अवशेष भूमि वापस लेने का आदेश दिया था। इसके बाद शासन ने टोल कंपनी के निर्माण में हुई धांधली की जांच के लिए 2007 में एक लेखा समिति का गठन किया था। समिति ने ऑडिट में पाया कि डीएनडी के लिए टोल कंपनी को 1998 में 487.711 एकड़ भूमि दी गई थी। इसमें 133.81 एकड़ भूमि का इस्तेमाल किया गया और 353.901 एकड़ भूमि बची। यह भूमि मार्च 2001 तक प्राधिकरण को वापस करनी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जमीन वापस न मिलने से प्राधिकरण को कुल 30,93,55,62,250 रुपये का नुकसान हो चुका है। टोल कंपनी ने रजिस्ट्री विभाग को भी चूना लगाया। कंपनी व प्राधिकरण के बीच 23 अक्टूबर 1998 को लीज-डीड हुई थी। इसे नियमानुसार पंजीकृत नहीं कराया गया। इससे राज्य सरकार को 1042122960 रुपये के राजस्व की हानि हुई।
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