Thursday, February 3, 2011

सीखचों के पीछे राजा


आखिरकार, भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में छिड़ी जंग का असर दिखना शुरू हो गया है। 2-जी स्पेक्ट्रम महाघोटाले में पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा की गिरफ्तारी का संकेत तो यही दिख रहा है। राजा से चौथी बार गहन पूछताछ के बाद सीबीआई ने उन्हें सीखचों के पीछे डाल दिया है। राजा के साथ पूर्व टेलीकॉम सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के सचिव चंदोलिया की गिरफ्तारी बता रही है कि महाघोटाले की आरोपी इस तिकड़ी के खिलाफ सीबीआई को ठोस सबूत मिले हैं। हालांकि, गिरफ्तारियों के पीछे हुई देरी से यह कयास भी लगाये जा रहे हैं कि केंद्र की यूपीए सरकार ने बदनामी का दाग धोने तथा विपक्ष को खामोश करने के लिए यह राजनीतिक बाजीगरी की है। तमाम आरोपों में घिरे होने के बावजूद राजा अपनी मंत्री की कुर्सी तब तक बचाने में कामयाब रहे थे जब तक जनमत के भारी विरोध का पानी सरकार के सिर के ऊपर से नहीं बहने लगा था। कमोबेश ऐसी ही हालत इस बार भी रही है। राजा के इस्तीफे के बाद उनके उत्तराधिकारी कपिल सिब्बल जब राजा पर आरोप लगाने वाले सरकारी ऑडिटर कैग की ही तीखी आलोचना पर उतर आए थे, तब देश आश्र्चयचकित रह गया था। देखना है कि सिब्बल अब क्या कहते हैं! वैसे राजा की गिरफ्तारी का तात्कालिक कारण जस्टिस शिवराज पाटिल कमेटी की रिपोर्ट को भी माना जा सकता है जिसके निशाने पर भी पूर्व टेलीकॉम मंत्री ही थे। दिलचस्प यह है कि इस एक सदस्यीय कमेटी का गठन भी सिब्बल ने ही टेलीकॉम मंत्रालय का प्रभार संभालने के तुरंत बाद किया था। एक और दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि कुछ घंटे पहले ही दिल्ली में कांग्रेस दिग्गजों से बातचीत कर वापस लौटे थे कि उनकी आंखों के तारे माने जाने वाले राजा सीखचों के पीछे पहुंच गए। पारिवारिक विवादों, राजनीतिक संकटों और चुनाव की आहट से परेशान डीएमके सुप्रीमो इस गिरफ्तारी पर कांग्रेस को आंखें दिखा सकें, इसकी संभावना न के बराबर है। उलटे, कांग्रेस अब उनसे चुनाव में मुंहमांगी सीटें वसूलने की स्थिति में आ गई है। सवाल है कि राजा पर कार्रवाई कर कांग्रेस क्या जेपीसी जांच की मांग को दबा पाएगी और इस महीने के महत्वपूर्ण बजट सत्र को बचा पाएगी! शायद नहीं, क्योंकि इस गिरफ्तारी से बीजेपी को बल मिल गया है और उसे यह भी मालूम है कि सरकार बजट सत्र का वह हश्र होने देने की हिम्मत नहीं दिखा पाएगी जो संसद के शीतकालीन सत्र का हुआ था। स्पेक्ट्रम महाघोटाले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग पर बीजेपी ने पूरे शीतकालीन सत्र को चलने ही नहीं दिया था। लेकिन, देश को इन राजनीतिक कलाबाजियों की परवाह नहीं है। वह तो यह देखना चाहता है कि भ्रष्टाचार पर सरकार कितनी गंभीर है। मुंबई के आदर्श हाउसिंग घोटाले में सीबीआई ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहान पर उंगली उठायी है। क्या उनके मामले भी कानून अपना कम करेगा! कॉमनवेल्थ खेल घोटाले पर शुंगलू कमेटी ने प्रसार भारती और दूरदर्शन के आला अधिकारियों को दागदार बताने के अलावा तत्कालीन खेलमंत्री तथा निगरानी रखने वाले मंत्रिमंडलीय समूह को भी आंखें बंद करने का जिम्मेदार पाया है। क्या ये बड़े लोग भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे! याद रहे, देश भ्रष्टाचारियों के हाथों अब और लुटने को तैयार नहीं है। भ्रष्ट व्यवस्था को शह देने वालों की भी अब खैर नहीं।

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