Tuesday, February 22, 2011

जरूरत ’दाग‘ मिटाने वाले डिटरजेंट की


जब एक दागी दूसरे दागी का नाम लेकर खुद को पाक-साफ बताने का दावा कर रहा है तो ऐसे में दाग साफ किया जाएगा या दागी को। राजनीतिज्ञ हों या फिर लोक सेवक जिन पर दाग होगा, उन्हें कैसे साफ किया जाएगा? केवल दाग साफ किए जाएंगे या फिर उन्हें धुंधला करने की जुगत की जाएगी। या फिर दाग लगे व्यक्ति चाहे जो भी हों, जहां भी हों, जैसे भी हों, उन्हें साफ किया जाएगा
कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के समय भ्रष्टाचार के कुछ मामले जब उछले तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री सहित देश ने कहा कि इस आयोजन से अभी देश की प्रतिष्ठा जुड़ी है। पहले खेल हों, बाद में पीछे के खेल का पता लगाया जाए। अभी कामनवेल्थ गेम्स के आयोजन में कथित भ्रष्टाचार का मामला पूरा-पूरा सामने नहीं आया था कि इसी बीच 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बात सामने आई। दोनों ही मामलों में हुए भ्रष्टाचार की छानबीन आज भी जारी है। सीबीआई सहित देश की प्रमुख एजेंसियां इस काम में लगी हुई हैं। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार को लेकर तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा, टेलीकाम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा के साथ-साथ कई लोग इन दिनों तिहाड़ में हैं। इसी बीच एस बैंड की डील में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। इसकी आंच प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची। थोड़ी माथा-पच्ची हुई, बाद में जैसे-तैसे इस डील को रद्द कर दिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों पर भ्रष्टाचार से संबंधित उठ रहे लगातार सवालों के चलते, खासतौर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भारी दबाव था। दबाव सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका को स्पष्ट करने का। प्रधानमंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की खातिर देश के चुनिंदा टीवी न्यूज चैनलों के संपादकों को अपने आवास पर बुलाया। अपनी कही, संपादकों की सुनी और उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की। संपादकों के साथ प्रधानमंत्री की इस बातचीत का प्रसारण दूरदर्शन के साथ-साथ ज्यादातर टीवी न्यूज चैनलों ने किया। भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवालों पर प्रधानमंत्री का स्पष्टीकरण कितना कारगर रहा, इसका आकलन सत्ता और विपक्ष दोनों करने में जुटे हैं। बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने जनता की आकांक्षाओं और सरकार की तैयारियों के बारे में बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी जनता सुशासन की हकदार है। यह उसका अधिकार और हमारा दायित्व।उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शासन की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा लाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रियों का एक समूह भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वैधानिक, प्रशासनिक तथा अन्य सभी उपायों पर विचार कर रहा है। यह समूह सार्वजनिक क्रय नीति तैयार करने, सार्वजनिक क्रय मानक निर्धारित करने, मंत्रियों को प्रदत्त विवेकाधिकारों की समीक्षा कर उन्हें समाप्त करने, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए खुली और प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था प्रारंभ करने, भ्रष्टाचार के आरोपी लोकसेवकों के विरुद्ध तीव्र गति से अभियोजन चलाने और उनके विरुद्ध द्रुत कार्रवाई करने के लिए कानूनों में यथोचित संशोधन करने संबंधी मामलों पर विचार करेगा। उक्त समूह चुनाव पर होने वाले खर्च के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दिए जाने के संबंध में भी विचार करेगा।
प्रधानमंत्री ने पिछले बुधवार को सहारा न्यूज नेटवर्क के एडिटर एवं न्यूज डायरेक्टर के सवाल के जवाब में कहा था कि मंत्रियों के विवेकाधिकारों की समीक्षा के लिए प्रणव मुखर्जी की अगुवाई में मंत्री समूह गठित है। साठ दिन के भीतर आने वाली इस रिपोर्ट का हमें भी इंतजार है। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में मंत्री समूह के कामकाज और भ्रष्टाचार रोकने के संभावित तौर-तरीकों पर विस्तृत काम करने जिक्र किया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की तैयारियों को विस्तार से बताया है। लेकिन बात भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने की हो रही है, रोकने की क्यों नहीं। राष्ट्रपति को तो इसे जड़ से मिटाने पर जोर देना चाहिए था। चलिए, सरकार ने राष्ट्रपति के जरिए देश से अपनी मंशा तो जाहिर की। भ्रष्टाचार से लड़ाई के लिए सरकार की चाहे जितनी भी बड़ी तैयारी हो पर इसे सेंट्रल हाल में मौजूद सांसदों ने उस उत्साह से नहीं लिया, जिसकी जरूरत थी। मतलब यह कि न तो किसी ने मेज थपथपाई और न ही बजी ताली। सरकारी पक्ष के सांसदों ने जब नहीं सराहा तो कम से कम विपक्ष को ही सराहना चाहिए। खैर, सभी मौन थे, शांत थे, गंभीर थे। राष्ट्रपति बोल रही थीं शायद इसलिए या फिर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के प्रति कठोर कार्रवाई का सरकार का दृढ़ इरादा देखकर। प्रधानमंत्री ने बड़े भरोसे के साथ कहा था कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। पहले प्रधानमंत्री ने जो कुछ कहा था, उस पर राष्ट्रपति ने आज अपनी मुहर लगा दी। राष्ट्रपति ने एक कदम आगे बढ़कर यहां तक कह दिया कि मेरी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक कन्वेंशन का अनुमोदन करने का भी फैसला किया है। दरअसल भ्रष्टाचार के खिलाफ यूएन कन्वेंशन को 14 दिसम्बर, 2005 को अपनाया गया था। इस मसौदे को अब तक करीब 140 देशों ने स्वीकार किया है, जबकि भारत ने अब मन बनाया है। यूएन कन्वेंशन के अनुच्छेद 5 की मंशा ऐसे कोडसे देशों को बांधना है, जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में कारगर साबित हो। इस कोड के मुताबिक चुनाव प्रचार में होने वाले खर्च का सही हिसाब रखना जरूरी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पब्लिक सव्रेट के लिए उसकी आय का समय-समय पर खुलासा जरूरी है। अनुच्छेद 51 के मुताबिक जिस देश से गबन होकर संपत्ति किसी दूसरे देश में पहुंचा दी गई है, उसे तत्काल वापस किया जाए। साथ ही अनुच्छेद 43 के मुताबिक गबन की जांच में एक देश को दूसरे देश की जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा। सरकार की तैयारी से साफ है कि भ्रष्टाचार पर उसकी लड़ाई धीरे-धीरे तेज होने वाली है। पिछले काफी समय से इशारों में भाजपा, खासतौर पर लालकृष्ण आडवाणी यूपीए चेयरपर्सन पर काले धन के खेल में शामिल होने का बार-बार आरोप लगाते रहे हैं। कुछ दिन पहले ही सोनिया गांधी के पत्र के जवाब में आडवाणी ने अपनी गलती मानी, खेद भी जताया। फिर भी विवाद ज्यों का त्यों है। राम जेठमलानी ने आज कह दिया कि सोनिया गांधी के पास काला धन है। कहां है, कितना है यह तो जेठमलानी ही जाने। जेठमलानी के इस आरोप का जवाब कैसा होगा, यह देखना काफी रोचक होगा। ऐसे ही अरुणांचल प्रदेश में एक शिविर के दौरान कांग्रेस सांसद नीनोंग एरिन ने स्वामी रामदेव पर अभद्र टिप्पणी की। टिप्पणी के पीछे काला धन और भ्रष्टाचार से जुड़ा सवाल था। बदले में स्वामी जी ने भी जो कहना था, कहा। राज्य के शिक्षा मंत्री ने माफी मांगी। स्वामी पर हुई टिप्पणी को किसी ने सराहा तो बहुतों ने नकारा। आग में घी का काम कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कर दिया। कह डाला कि रामदेव के पास भी काला धन है। रामदेव की संपत्ति की जांच होनी चाहिए, और भी कुछ कहा। बस क्या था, स्वामीजी आपा खो बैठे। फिर क्या पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया गांधी तक सभी पर बरस पड़े। सुब्रह्मण्यम स्वामी अलग तरीके से भ्रष्टाचार से जुड़े मामले लगातार उठाते रहे हैं। प्रधानमंत्री से दोस्ती और सोनिया गांधी पर आरोप लगाने को लेकर कांग्रेसी खेमे में भी तरह-तरह के सवाल उठते रहते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई के चलते आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बहती गंगा में सभी डुबकी लगा लेना चाहते हैं। कोई किसी को फंसाने में तो कोई बचाने की तरकीब तलाश रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रपति ने आज काले धन के संबंध में चल रही र्चचाओं पर चिन्ता जाहिर की। ईमानदारी से की गई कमाई पर देने वाले कर की चोरी से जमा किया गया धन हो या फिर गैर कानूनी तरीके से कमाया गया। सरकार की नजर अब छोटी-बड़ी सभी मछलियों पर है। सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई तेज करने की मंशा पर सवाल लोकपाल विधेयक को लेकर भी है। काफी समय से लंबित इस विधेयक को जितनी जल्दी हो सके, सामने लाने की जरूरत है। सरकार ने व्हिसल ब्लोअरविधेयक संसद में पेश किया है। पोल खोलवाले इस विधेयक से किसकी कितनी पोल खुलेगी, यह तो इसके अमल में आने के बाद पता चलेगा। इस विधेयक में इस बात का प्रावधान है कि जनहित में खुलासा करने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। न तो कोई गलत शिकायत कर सकेगा और न ही जो गलत होगा वह बच सकेगा। पर इसमें भी नौकरशाहों पर शिकायती जांच का फैसला सीवीसी को करना होगा। सीवीसी को और अधिकार मिलेंगे। न्यायिक अधिकार भी हासिल होगा। पहला सवाल तो यह है कि सूचना देने वाले किसी भी व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा। यह गोपनीयता कौन बनाकर रखेगा, अगर नाम बाहर आया तो जवाबदेही कैसे तय होगी? दूसरी बात जब एक दागी दूसरे दागी का नाम लेकर खुद को पाक-साफ बताने का दावा कर रहा है तो ऐसे में दाग साफ किया जाएगा या दागी को। राजनीतिज्ञ हों या फिर लोक सेवक जिन पर दाग होगा, उन्हें कैसे साफ किया जाएगा? केवल दाग साफ किए जाएंगे या फिर उन्हें धुंधला करने की जुगत की जाएगी। या फिर दाग लगे व्यक्ति चाहे जो भी हों, जहां भी हों, जैसे भी हों, उन्हें साफ किया जाएगा। सरकार, खासतौर पर प्रधानमंत्री की नीयत पर किसी को संदेह नहीं है। परंतु दाग साफ करने के लिए जिस डिटरजेंटकी जरूरत देश को है, वह कहां मिलेगा? मिलेगा तो उसकी खरीद-फरोख्त में क्या कोई दूसरा दागी तो नहीं तैयार हो जाएगा? अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो दाग मिटाया कैसे जाएगा यानी कितने पानी में कितना डिटरजेंट घोला जाएगा? दाग की मजबूती और डिटरजेंट की गुणवत्ता निर्धारित करेगी कि दाग साफ होगा या डिटरजेंट मैला। जिस तैयारी में प्रधानमंत्री दिखते हैं, उससे अच्छे परिणाम निश्चित रूप से सामने आएंगे। दाग साफ भी न हुए तो कम दागी ही दिखेंगे।




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