गुजरात के 2500 भ्रष्ट अधिकारी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के दावे में पलीता लगाने में जुटे हैं। सरकार भले राज्य प्रशासन के साफ सुथरे होने की वकालत करती हो लेकिन सतर्कता आयोग की रिपोर्ट इसकी पोल खोल देती है। बीते तीन सालों में प्रदेश के 21,300 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है। सतर्कता आयुक्त ने इनमें से 2500 के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। विधानसभा में पेश सतर्कता आयोग की वर्ष 2010 की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2008 से 2010 के दौरान प्रदेश के 21,518 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें हुई हैं। मुख्य सतर्कता आयुक्त डॉ. मंजुला सुब्रमण्यम ने इन मामलों की जांच के बाद राज्य सरकार को 2,505 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। दोषी पाए गए अधिकारियों में 13 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं जबकि 1385 राजपत्रित व 1148 गैर राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। राज्य भर से सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ हुई हैं जबकि पंचायत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 999 शिकायतें जबकि शिक्षा तथा गृह विभाग के खिलाफ करीब 750 जबकि स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ सबसे कम 362 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। गौरतलब है कि सतर्कता आयोग को वर्ष 2008 में 7186, वर्ष 2009 में 7093 जबकि वर्ष 2010 में सतर्कता आयोग को कुल 7339 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। आयुक्त डॉ. मंजुला ने शिकायतों की जांच के बाद 2505 अधिकारियों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई की सिफारिश की है। आयोग ने 26 राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ आइपीसी, 440 के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा नियमों के मुताबिक, 14 के खिलाफ पेंशन नियमों के तहत करीब 500 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।
Friday, September 30, 2011
मोदी के सुशासन में पलीता लगा रहे 2500 भ्रष्ट अधिकारी
वित्त मंत्रालय की फाइल से कुछ पन्ने गायब
2जी घोटाले में गृह मंत्री पी. चिदंबरम को मुश्किल में डालने वाले दस्तावेज दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट पहंुच गए हैं। सीबीआइ ने गुरुवार को पूर्व वित्त सचिव डी सुब्बाराव के बयान के साथ वित्त मंत्रालय के अन्य दस्तावेजों की फाइल सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। अदालत ने फाइल देखी और कुछ पृष्ठ गायब होने पर उसे ठीक करके दोबारा देने को कहा है। इन दस्तावेजों में सुब्बाराव का वह बयान शामिल है जिसमें उन्होंने नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम आवंटन की बात कही थी जबकि तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा ने कंपनियों को 2001 की कीमत पर 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया। सुब्बाराव की यह सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए वित्त मंत्रालय के चर्चित नोट का हिस्सा भी बनी है। सुब्बाराव इस समय रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी। जिरह के दौरान सीबीआइ चिदंबरम के बचाव के अपने रुख पर कायम है। उसने कहा कि वित्तमंत्री को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय का नजरिया तो शुरू से ही नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम देने का था। लाइसेंस, शेयर सभी में यही नजरिया था। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने 7 जनवरी 2008 को एक नोट भी तैयार किया था। जिस पर 9 जनवरी को होने वाली टेलीकाम कमीशन की पूर्ण बैठक में चर्चा होनी थी लेकिन ये बैठक 15 जनवरी 2008 तक के लिए टाल दी गई और इस बीच राजा ने 10 जनवरी 2008 को लाइसेंस आवंटित कर दिए। एजेंसी ने कहा कि जब तक राजा को रोका जाता तब तक उन्होंने लाइसेंस आवंटित कर दिए थे। इस पर याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि उस दिन सिर्फ आशय पत्र जारी हुए थे स्पेक्ट्रम तो बहुत बाद में दिया गया। अत: इसे रोकने के लिए काफी समय था। सीबीआइ ने दलील काटते हुए कहा कि वित्त मंत्री को अकेले लाइसेंस रद करने का अधिकार नहीं था। यह सरल निर्णय नहीं था यह तो पूरी सरकार को निर्णय लेना था उसके परिणाम देखने पड़ते। उसने एसआइटी गठन का भी विरोध किया और कि इस मामले की बिना प्रभावित हुए जांच की गई है।
Thursday, September 29, 2011
भ्रष्टाचार के मामलों की खुद जांच करना चाहता है सीवीसी
लोकपाल के अधीन लाए जाने की चर्चा के बीच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की कमान स्वयं अपने हाथ में लेने की ख्वाहिश जाहिर की है। सीमित अधिकारों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के कारण उसकी स्वतंत्रता एक दायरे में सिमट कर रह गई है। बुधवार को एक साक्षात्कार के दौरान केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि आयोग के अधीन एक विशेष जांच ब्यूरो का गठन किया जाए जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की प्रभावी जांच करने के साथ ही मुकदमे की त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे। अभी तक सीवीसी मामलों की विजिलेंस रिपोर्ट तैयार आपराधिक जांच के लिए उन्हें सीबीआइ या विभाग के मुख्य सतर्कता आयुक्तों को भेजती है। कुमार ने कहा कि एक ऐसी समर्पित जांच शाखा की जरूरत है क्योंकि कई ऐसे महत्वपूर्ण मामले पहले से ही आयोग के हाथों में हैं जिनकी वह सीधे तौर पर जांच कर रहा है। मालूम हो कि सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रमंडंल खेलों के दौरान तमाम अनियमितताओं को उजागर किया था। कुमार ने कहा कि मौजूदा कानून के तहत सीवीसी को समूचे सतर्कता प्रशासन की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही सीवीसी को कार्य करना पड़ता है और इस तरह उसकी स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। आयुक्त ने कहा कि कुछ विशेष दिशा-निर्देशों में सुधार लाकर जांच के मानकों को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके ही अनैतिक व्यवहार पर रोक लगाई जा सकेगी। कुमार ने भ्रष्टाचार के मामलों में कठोरता के साथ कदम उठाने और ईमानदार लोगों के लिए बेहिचक काम करने का माहौल सुनिश्चित करने को आयोग की प्राथमिकता बताया। उन्होंने बताया कि विजिलेंस के काम को और उद्देश्यपरक और प्रभावी बनाने के लिए आयोग जांच के अपने मानक विकसित कर रहा है। भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा कि आयोग का भार बढ़ता जा रहा है और मौजूदा मानव संसाधन पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। नियुक्तियों का अधिकार आयोग को नहीं है। आयोग ने जरूरी कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की मांग सरकार से की है। आयुक्त ने कहा कि मौजूदा समय में राष्ट्रमंडल खेलों में अनियमितता और कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों की जांच की जा रही है। आयोग की ताजा प्रदर्शन रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार के लगभग 1681 मामलों का निपटारा किया गया और लगभग 5.94 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई।
Tuesday, September 27, 2011
चिदंबरम की इस्तीफे की पेशकश
प्रणव और चिदंबरम ने की सोनिया से मुलाकात
नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में वित्त मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र ने कांग्रेस की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया दिया है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे प्रकरण से बेहद आहत गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की पेशकश की। महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका से लौटने के बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। प्रणव लगभग एक घंटे तक सोनिया के साथ रहे। इससे पूर्व प्रणव ने चिदंबरम से भी बात की। बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम से जितने आहत चिदंबरम हैं, उतने ही नाराज प्रणव मुखर्जी भी हैं और इन दोनों से कहीं ज्यादा आहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। सूत्रों की मानें तो स्वदेश वापसी के बाद प्रधानमंत्री कोई बड़ा पैसला ले सकते हैं। सरकार के दोनों वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी का कारण यह है कि पूरे घटनाक्रम में जिस तरह से वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री की भूमिका को लेकर संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है, उससे दादा की भौहें तनी हुई हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात में प्रणव ने जहां प्रधानमंत्री से न्यूयार्क में हुई अपनी बातचीत का ब्यौरा दिया, वहीं कहा कि वित्त मंत्रालय के नोट को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।उधर गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सोनिया से मुलाकात में साफ कहा कि जिस तरह से उनकी छवि पर सवाल उठाए जा रहे हैं उससे न केवल वह आहत हैं, बल्कि उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश यह कर की कि वह नहीं चाहते हैं कि उनके कारण पार्टी को असहज स्थितियों का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए कि उनके खिलाफ राजनीतिक षड़यंत्र के लिए कौन जिम्मेदार है।
| चिदंबरम की नाराजगी को इससे भी समझा जा सकता है कि कल बाढ़ का जायजा लेने के लिए उड़ीसा जाने के कार्यक्रम को उन्होंने रद्द कर दिया है। मामले में कुछ भी कहने से पूर्व वह एक बार प्रधानमंत्री से बात करना चाहते हैं। पार्टी नेतृत्व की समस्या यह है कि जितना वह मामले को शांत करने की कोशिशों में जुटा है उतना ही मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी विधिवेत्ताओं से यह राय भी ले रही है कि क्या वित्त मंत्रालय के नोट को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकता है। इससे पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को स्वदेश वापसी के बाद अपने मंत्रालय पहुंचकर अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। इस पूरे मामले में जहां वित्त मंत्रालय अपने को पाक साफ मान रहा है तो वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि नोट वित्त मंत्रालय से आया है इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि एक सामान्य नोट के चलते पूरी सरकार का अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। दस जनपथ में दोनों मंत्रियों की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अब पार्टी नेतृत्व को प्रधानमंत्री की स्वदेश वापसी का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ही पार्टी अपनी रणनीति के पत्ते खोलेगी। उधर, सरकार के मंत्री 2 जी नोट को सामान्य प्रक्रिया बताकर मामले को जितना सहज बनाने की कोशिशें में जुटे हैं, पार्टी की अंतर्कलह उनके प्रयासों पर पानी फेर रही है। केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने सोमवार को फिर साफ किया कि सरकार के मंत्रियों में कोई मतभेद नहीं है और वित्त मंत्रालय द्वारा भेजा गया नोट एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने फिर गृहमंत्री को ईमानदार और सक्षम मंत्री बताते हुए कहा कि उनके ऊपर संदेह का कोई मतलब ही नहीं है। सरकार के साथ ही पार्टी भी पूरी तरह से चिदंबरम के पक्ष में खड़ी है। पार्टी ने आज फिर चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। पार्टी जहां चिदंबरम का बचाव कर रही है तो वहीं नोट के लिए वित्त मंत्री का भी पक्ष यह कहते हुए ले रही है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। वित्त मंत्री और गृहमंत्री दोनों की चुप्पी से रहस्य और गहराता जा रहा है। केंद्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल में पहली बार कांग्रेस पार्टी के मंत्री ही नहीं, प्रधानमंत्री भी निशाने पर हैं। पार्टी की समस्या यह है कि ताजा विवाद में शामिल उसके दोनों ही मंत्री न केवल काफी वरिष्ठ हैं, बल्कि तेज तरार्र भी हैं। पार्टी नेतृत्व मान रहा है कि इस बार का संकट काफी गंभीर है और यदि इससे सही तरीके से नहीं निपटा गया तो सरकार और पार्टी दोनों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। मामले की गंभीरता को समझते हुए ही सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहीं पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वयं कमान संभाली। इलाज कराकर वापस लौटने के बाद आज पहली बार उन्होंने अपने दोनों मंत्रियों से लगभग डेढ़ घंटे बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच फोन पर बात हुई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विधि मंत्री सलमान खुर्शीद से भी इस मामले में बात की है। पार्टी न्यायालय के रुख को लेकर भी काफी सहमी हुई है। गौरतलब है कि न्यायालय के कड़े रुख के चलते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और दयानिधि मारन को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। |
