लोकपाल विधेयक पर टीम अन्ना की तीन मांगों पर संसद की भावना हालांकि संसदीय समिति पर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इस बात की संभावना बहुत कम है कि समिति उसे खारिज कर दे। यह मानना है राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली का। उनके अनुसार संसद ने पूरे देश के सामने यह प्रतिबद्धता व्यक्त की है और संभावना न के बराबर है कि सदन इससे पीछे हटे। एक टेलीविजन चैनल को दिए गए साक्षात्कार में जेटली ने कहा, संसदीय व्यवस्था के लचीलेपन के कारण काफी गुंजाइश होती है। अगर आप मुझसे एक वाक्य में पूछेंगे तो मेरा मानना है कि यह सदन की भावना थी जिसमें दो बार प्रस्ताव शब्द का उल्लेख किया गया था। इसलिए इसमें विरोधाभास हो सकता है, लेकिन मैं यह मानता हूं कि यह सदन का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि अब यह संसदीय समिति पर है कि वह विधेयक में किस तरह से सदन की भावना का समावेश करती है। जेटली ने कहा कि सदन संसदीय समिति का सम्मान करता है इसलिए उसे इस संबंध में किसी तरह का निर्देश नहीं दिया गया है। मालूम हो कि अन्ना की तीन अहम मांगों में सबसे पहली थी कि राज्यों में भी लोकपाल की ही तर्ज पर लोकायुक्त कायम हो। इसी तरह उन्होंने कहा था कि सभी केंद्रीय कर्मचारी लोकपाल के और राज्य सरकार के सभी कर्मचारी संबंधित राज्य के लोकायुक्त के दायरे में आएं। अन्ना की तीसरी मांग थी कि नागरिक घोषणा-पत्र के जरिए जनता के सारे काम तय समय सीमा में हों
Monday, September 5, 2011
लोकपाल पर संसद की भावना खारिज होने की संभावना नहीं
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