Friday, September 23, 2011
चिदंबरम पर बढ़ा इस्तीफे का दबाव
नई दिल्ली 2 जी घोटाले में अपने ही कठघरे में खड़ी सरकार पर विपक्ष ने जोरदार हमला बोला है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के प्रधानमंत्री को लिखे पत्र के खुलासे से विपक्ष को सरकार के खिलाफ नया गोला बारूद मिल गया है। भाजपा ने दो टूक कहा है कि अब गृह मंत्री पी चिदंबरम को जाना ही होगा। चाहे वह खुद इस्तीफा दें या फिर उन्हें बर्खास्त किया जाए। साथ ही मनमोहन सिंह को भी निशाने पर लेते हुए कहा, वह गुमराह क्यों हो जाते हैं, देश की जनता इसका जवाब चाहती है। सरकार की सहयोगी द्रमुक ने विपक्ष के सुर में सुर मिलाया है। गैर राजग दल अन्नाद्रमुक ने भी चिदंबरम का इस्तीफा मांगा, जबकि माकपा ने चिदंबरम के खिलाफ सीबीआइ से जांच की मांग की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पीएसी के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 2जी घोटाले के लिए चिदंबरम को जेल में बंद ए. राजा के साथ सह अपराधी करार देते हुए कहा है कि प्रणब मुखर्जी के पत्र से सारा सच सामने आ गया है। साल 2008 में वित्त सचिव की आपत्ति के बावजूद वित्त मंत्री रहते चिदंबरम ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन का समर्थन किया। यदि उन्होंने यह नहीं किया होता तो यह घोटाला नहीं होता। डॉ. जोशी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वह गुमराह क्यों होते हैं? अब उनको इसका जवाब देश को देना होगा। संसद की लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में भी चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। सरकार के खिलाफ तीखे तेवरों व धारदार आरोपों से लैस डॉ. जोशी ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया की भी विदाई की मांग कर डाली। उन्होंने कहा, गरीबी की बेतुकी परिभाषा गढ़ने वाले मोंटेक को भी चिदंबरम की राह पर भेज दिया जाए तो अच्छा होगा। यह दोनों अपने पद छोड़ कर हमें बख्श दें तो अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम उस समय के दूरसंचार मंत्री ए. राजा के 2जी स्पेक्ट्रम फार्मूले से सहमत थे। अगर तब चिदंबरम ने यह रूख अपनाया होता कि 2008 में 2001 के दामों पर स्पेक्ट्रम नहीं बेचा जा सकता है तो देश में इतना बड़ा घोटाला नहीं होता। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी चिदंबरम का इस्तीफा मांगते हुए मनमोहन सिंह को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, मुखर्जी के पत्र के साथ 21 और पत्र हैं जो प्रधानमंत्री व वित्त मंत्रालय के बीच के हैं। ऐसे में क्या प्रधानमंत्री कहेंगे कि उन्हें कुछ नहीं मालूम था? जब इस मामले में न्यायपालिका कुछ कहती है तो कांग्रेस उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का सवाल उठाती है, लेकिन अब तो उसके सबसे वरिष्ठ व अनुभवी मंत्री ने सारा खुलासा किया है। यह मामला जनता के बीच है और उसे यह जानने का हक है कि चिदंबरम ने सही काम किया या नहीं। अन्नाद्रमुक ने भी भाजपा की राह पर चलते हुए चिदंबरम का इस्तीफा मांगा है। माकपा ने इस मामले में चिदंबरम के खिलाफ सीबीआइ से जांच की मांग की है। सरकार की सहयोगी द्रमुक ने भी विपक्ष के साथ खड़े होकर चिदंबरम की तरफ अंगुली उठाई है
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