Tuesday, September 20, 2011
खेलगांव के फ्लैटों का सीबीआइ ने बिगाड़ा खेल
नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलगांव में अतिरिक्त बनाए गए फ्लैट और बढ़ गए एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) आदि को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर सीबीआइ ने पूरी योजना की जांच शुरू कर दी है। सीबीआइ ने डीडीए मुख्यालय से इस मामले से संबंधित फाइलें जब्त की हैं। सीबीआइ की वही टीम जांच कर रही है, जिसने सीरीफोर्ट मामले में सीएजी रिपोर्ट के आधार पर एफआइआर दर्ज की है। ऐसे में खेल गांव के फ्लैटों तक जनता की शीघ्र पहुंच को झटका लग सकता है, जबकि डीडीए अपने हिस्से के 722 फ्लैट बेचने की फिराक में था और बिल्डर कंपनी ने अपने हिस्से के बेचे गए 446 फ्लैट लोगों को शीघ्र देने का आश्र्वासन दे रखा था। मगर अब सब लटकता नजर आ रहा है। ज्ञात हो कि खेल गांव में 17 फ्लैट अतिरिक्त बन गए थे जिन्हें कुछ समय पहले तोड़ दिया गया। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खेलगांव के निर्माण में कुछ अनियमितताओं का जिक्र किया था। हालांकि खेलों के बाद से डीडीए और बिल्डर कंपनी के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। फिर भी फ्लैटों की योजना बीच में फंसी होने के चलते कुछ समय पहले दोनों ओर से पहल हुई थी। इस पर डीडीए ने मरम्मत के लिए फ्लैटों के टावर कंपनी को देने शुरू किए थे। मगर डीडीए की ओर कुछ टावर सील कर दिए जाने के कारण मामला फिर से उलझ गया था। डीडीए चाहता था कि फ्लैटों में अतिरिक्त एफएआर मामले को कुछ टावर सील कर निपटा लिया जाए। मगर कंपनी को यह पसंद नहीं आया और कंपनी इस पर राजी नहीं हुई। इससे मामला फिर उलझ गया है। बहरहाल डीडीए ने यह मामला शहरी विकास मंत्रालय के पास भेज दिया है। उधर दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन ने भी इस योजना को कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं दिया है। ये पचड़े तो पहले से ही फंसे हुए हैं और अब ताजा मामला सीबीआइ का जुड़ गया है। ज्ञात हो कि खेलगांव में कुल 34 टावरों में 1168 फ्लैट हैं। इनमें एमार एमजीएफ के 446 और डीडीए के 722 फ्लैट हैं। अब सीबीआइ की तलवार लटकने से डीडीए के हिस्से के फ्लैट्स की नीलामी रुक गई है और न ही बिल्डर कंपनी एमार एमजीएफ अपने हिस्से के बेचे गए फ्लैट्स को उनके मालिकों को सौंप सकती है
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