Sunday, September 25, 2011

सुब्बा राव से दोबारा पूछताछ करेगी सीबीआइ

नई दिल्ली पीएमओ को भेजे गए वित्त मंत्रालय के नोट में हुए नए खुलासे के बाद सीबीआइ 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की नए सिरे से जांच में जुट गई है। इस सिलसिले में स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े तत्कालीन वित्त सचिव डी.सुब्बाराव समेत वित्त मंत्रालय के तत्कालीन अफसरों से नए सिरे से पूछताछ होगी। यह वही नोट है, जिसमें तत्कालीन वित्त मंत्री पी.चिदंबरम और संचार मंत्री ए.राजा के बीच हुई बैठक का विवरण है। बैठक के मिनट्स तत्कालीन वित्त सचिव व भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा गवर्नर डी. सुब्बाराव ने तैयार किए थे, जो इस बैठक में मौजूद थे। इसके पहले सीबीआइ ने सुब्बा राव के बयान के आधार पर 2जी घोटाले में चिदंबरम को क्लीन चिट दी थी। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के सिलसिले में वित्त मंत्रालय के तत्कालीन अफसरों से लंबी पूछताछ की गई थी। इनमें उस समय वित्त सचिव रहे सुब्बा राव भी शामिल थे। इन अधिकारियों ने अपने बयान में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से अपना पल्ला झाड़ते हुए इसकी सारी जिम्मेदारी संचार मंत्रालय पर डाली थी। जाहिर है इन्हीं बयानों के आधार पर चिदंबरम को भी क्लीन चिट दी गई थी, लेकिन वित्त मंत्रालय के नए खुलासे ने तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। जाहिर है इस नोट से दिए गए तथ्यों के बारे में सुब्बा राव समेत मामले से जुड़े सभी अधिकारियों से दोबारा पूछताछ की जाएगी। वैसे इस मामले में चिदंबरम से पूछताछ को लेकर सीबीआइ अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए नोट में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम पर घोटाले के दौरान निष्कि्रय रहने का आरोप लगाया गया है। इस नोट में कहा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के 20 दिन बाद तत्कालीन संचार मंत्री ए.राजा और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बीच एक बैठक हुई थी। बैठक में तत्कालीन वित्त सचिव डी.सुब्बाराव भी मौजूद थे। उन्होंने ही बैठक के मिनट्स तैयार किए थे। इसके मुताबिक, चिदंबरम ने कहा था कि स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में हम वर्तमान दरों और राजस्व अंशधारिता के पुर्न निर्धारण नहीं करेंगे। उनका कहना था कि आवंटन वापसी के नियंत्रण के वर्तमान नियमों-प्रावधानों पर विचार की आवश्यकता है। इस बैठक के तीन माह बाद अप्रैल दो 2008 में राजा ने अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत तीन साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर विलय और अधिग्रहण के नियमों में बदलाव का आदेश जारी कर दिया। इस नए आदेश का फायदा स्वान और यूनीटेक को हुआ, जिन्होंने भारी मात्रा में अपने स्पेक्ट्रम टेलीनॉर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बेंच दिए। नोट के मुताबिक, उस समय वित्त मंत्रालय चाहता तो एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के घोटाले को रोका जा सकता था। वैसे सीबीआइ अधिकारियों का मानना है कि इस नोट से यह स्पष्ट नहीं है कि घोटाले की साजिश में वित्त मंत्रालय के तत्कालीन अधिकारी की भी संलिप्तता थी। एक अधिकारी ने कहा, घोटाले की साजिश में शामिल होने के स्पष्ट सबूत के अभाव में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती

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