Thursday, September 15, 2011

करुणानिधि के ड्रीम प्रोजेक्ट पर कैग ने भी उठाई अंगुली

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने भी करोड़ों की लागत से बने डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि के ड्रीम प्रोजेक्ट पर अंगुली उठा दी है। कैग ने विधानसभा के नए परिसर में करोड़ों रुपये बेवजह फूंके जाने का खुलासा किया है। इससे नई इमारत में अस्पताल बनाने का एलान कर चुकीं मुख्यमंत्री जयललिता के आरोपों को बल मिला है। एआइडीएमके ने नए विधानसभा परिसर के निर्माण की जांच का आदेश पहले ही दे रखा है। कैग ने इस भवन में एक अस्थायी गुंबद के निर्माण में अनावश्यक खर्च का पता लगाया है। 31 मार्च 2010 को समाप्त वर्ष में कैग ने राज्य के लोक निर्माण विभाग पर स्थायी गुंबद के निर्माण में देरी का आरोप मढ़ा है जिस कारण करोड़ों रुपये का अनावश्यक खर्च हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है, परियोजना परामर्शदाता ने अगस्त 2009 में गुंबद के डिजाइन को तैयार कर लिया था जिसके बाद 17. 80 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कार्य उसी वर्ष नवंबर में एक अन्य ठेकेदार को सौंप दिया गया था। परामर्शदाता द्वारा गुंबद के डिजाइन की विस्तृत नक्शा सौंपने में देरी के कारण समझौते पर दिसंबर 2009 में हस्ताक्षर किए गए। इस बीच सरकार ने 13 मार्च 2010 को भवन के उद्घाटन की तारीख भी तय कर दी। चूंकि उद्घाटन की तारीख तक गुंबद का निर्माण किया जाना संभव नहीं था, इसलिए परामर्शदाता ने विभाग को इसके प्रोटोटाइप को मुहैया कराने का सुझाव दिया ताकि गुंबद की रूपरेखा का अध्ययन किया जा सके और 100 फुट की ऊंचाई पर निर्मित होने वाले बड़े प्रस्तावित गुंबद की बेहतर समझ हासिल हो सके। कैग ने कहा, इसके बाद मार्च 2010 में एक अस्थायी गुंबद के निर्माण के लिए निविदा निमंत्रित किए बिना 3 ़ 28 करोड़ रुपये की लागत से एक फर्म को ठेका दे दिया गया और इस कार्य को करा लिया गया। स्थायी गुंबद मुहैया करा पाने में विभाग की असफलता के कारण अस्थायी गुंबद का निर्माण कराना पड़ा। स्थायी गंुबद के डिजाइन और मंजूरशुदा अनुमानित खर्च में अस्थायी गुंबद का प्रावधान नहीं था। इसलिए अस्थाई गुंबद पर 3.28 करोड़ रुपये का खर्च बेकार साबित हुआ। कैग की ताजा रिपोर्ट के बाद अगर एआइडीएमके सरकार द्वारा कराई जा रही जांच रिपोर्ट में प्रतिकूल बातें सामने आती हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की मुसीबतें बढ़ सकती हैं

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