Monday, September 5, 2011

बैठक के लिए डब्लूएचओ से लिया पैसा

नई दिल्ली देश में लाखों लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं,अस्पतालों में डाक्टरों व दवाओं का टोटा है,क्योंकि सरकार का हाथ तंग है। इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्रालय को किसी के आगे हाथ फैलाना मंजूर नहीं। हां,अगर विभागीय मंत्री की इच्छा पूरी करनी हो तो उसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के सामने झोली फैलाने से गुरेज नहीं। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने अफसरों संग दिल्ली से बाहर सात सितारा होटल में रुक कर दो दिन चिंतन की इच्छा जाहिर की तो मंत्रालय ने डब्लूएचओ से 3,31,250 रुपये की आर्थिक मदद की गुहार लगा दी। इतना ही नहीं, बिना मंजूरी के बैठक (नाश्ते, खाने, आवागमन और ठहरने) पर आठ लाख से ज्यादा उड़ा दिए। इस खर्च पर खुद मंत्रालय के ही वित्त संभाग ने एतराज किया है। दैनिक जागरण के पास उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि गुड़गांव के होटल-रिजोर्ट में ऑफ साइट रिट्रीट के लिए मंत्रालय के निदेशक संजय प्रसाद ने 16 सितंबर 2010 को डब्लूएचओ से 3,31,250 रुपये की मदद मांगी थी। चूंकि भारत सरकार में ऐसे आयोजन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री अपने अफसरों और गैर सरकारी विशेषज्ञों के साथ दो दिन चिंतन करना चाहते थे। इसके लिए गुड़गांव के सबसे महंगे होटल को चुना गया था। तीन वाक्य के इस पत्र में प्रसाद ने लिखा है कि चूंकि भारत ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई अहम पड़ाव हासिल किए हैं और खास कर देश के पिछड़े जिलों पर सरकार का ध्यान है। इसलिए यह आर्थिक मदद मुहैया करवाई जाए। मजे की बात है कि पत्र में इसे ऑफ साइट रिट्रीट की बजाय दो दिन की रणनीतिक बैठक बताया गया। शुरुआती आकलन के मुताबिक इस रिट्रीट पर कुल 3.31 लाख ही खर्च होना था। मगर यह बढ़ कर हो गया 8.46 लाख रुपये। इसके लिए मंत्रालय के वित्त संभाग की मंजूरी भी नहीं ली गई। बैठक हो जाने के अगले महीने जब मंत्रालय के इंटीग्रेटेड फाइनांस डिवीजन को यह फाइल भेजी गई तो उसने इस पर साफ लिख दिया कि, चूंकि खर्च कर दिए जाने के बाद इसे हमारे पास भेजा गया है, इसलिए मंजूरी देने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है। दस्तावेज में सात हजार रुपये किराये वाले कमरे का खर्च 1,75,000 रुपये, होटल पहुंचने का खर्च: 1,23,949 रुपये तथा चाय, स्नैक्स, लंच सहित कांफ्रेंस हॉल का खर्च: 1,56,250 रुपये दर्शाया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली में मंत्रालय के दफ्तर से मानेसर के होटल की दूरी सिर्फ 40 किलोमीटर है। गौरतलब है कि पिछले साल जब भारत में एच1एन1 की महामारी फैली और लोगों की जान जा रही थी और डब्लूएचओ 20 लाख टीके बांटने वाला था, तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेने से इनकार कर दिया था। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े दानदाता बिल गेट्स को भी सरकार साफ कर चुकी है कि वह अपने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए आत्म निर्भर है

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