Friday, September 30, 2011

वित्त मंत्रालय की फाइल से कुछ पन्ने गायब

2जी घोटाले में गृह मंत्री पी. चिदंबरम को मुश्किल में डालने वाले दस्तावेज दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट पहंुच गए हैं। सीबीआइ ने गुरुवार को पूर्व वित्त सचिव डी सुब्बाराव के बयान के साथ वित्त मंत्रालय के अन्य दस्तावेजों की फाइल सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। अदालत ने फाइल देखी और कुछ पृष्ठ गायब होने पर उसे ठीक करके दोबारा देने को कहा है। इन दस्तावेजों में सुब्बाराव का वह बयान शामिल है जिसमें उन्होंने नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम आवंटन की बात कही थी जबकि तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा ने कंपनियों को 2001 की कीमत पर 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया। सुब्बाराव की यह सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए वित्त मंत्रालय के चर्चित नोट का हिस्सा भी बनी है। सुब्बाराव इस समय रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी। जिरह के दौरान सीबीआइ चिदंबरम के बचाव के अपने रुख पर कायम है। उसने कहा कि वित्तमंत्री को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय का नजरिया तो शुरू से ही नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम देने का था। लाइसेंस, शेयर सभी में यही नजरिया था। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने 7 जनवरी 2008 को एक नोट भी तैयार किया था। जिस पर 9 जनवरी को होने वाली टेलीकाम कमीशन की पूर्ण बैठक में चर्चा होनी थी लेकिन ये बैठक 15 जनवरी 2008 तक के लिए टाल दी गई और इस बीच राजा ने 10 जनवरी 2008 को लाइसेंस आवंटित कर दिए। एजेंसी ने कहा कि जब तक राजा को रोका जाता तब तक उन्होंने लाइसेंस आवंटित कर दिए थे। इस पर याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि उस दिन सिर्फ आशय पत्र जारी हुए थे स्पेक्ट्रम तो बहुत बाद में दिया गया। अत: इसे रोकने के लिए काफी समय था। सीबीआइ ने दलील काटते हुए कहा कि वित्त मंत्री को अकेले लाइसेंस रद करने का अधिकार नहीं था। यह सरल निर्णय नहीं था यह तो पूरी सरकार को निर्णय लेना था उसके परिणाम देखने पड़ते। उसने एसआइटी गठन का भी विरोध किया और कि इस मामले की बिना प्रभावित हुए जांच की गई है।

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