Thursday, September 29, 2011

भ्रष्टाचार के मामलों की खुद जांच करना चाहता है सीवीसी

लोकपाल के अधीन लाए जाने की चर्चा के बीच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की कमान स्वयं अपने हाथ में लेने की ख्वाहिश जाहिर की है। सीमित अधिकारों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के कारण उसकी स्वतंत्रता एक दायरे में सिमट कर रह गई है। बुधवार को एक साक्षात्कार के दौरान केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि आयोग के अधीन एक विशेष जांच ब्यूरो का गठन किया जाए जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की प्रभावी जांच करने के साथ ही मुकदमे की त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे। अभी तक सीवीसी मामलों की विजिलेंस रिपोर्ट तैयार आपराधिक जांच के लिए उन्हें सीबीआइ या विभाग के मुख्य सतर्कता आयुक्तों को भेजती है। कुमार ने कहा कि एक ऐसी समर्पित जांच शाखा की जरूरत है क्योंकि कई ऐसे महत्वपूर्ण मामले पहले से ही आयोग के हाथों में हैं जिनकी वह सीधे तौर पर जांच कर रहा है। मालूम हो कि सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रमंडंल खेलों के दौरान तमाम अनियमितताओं को उजागर किया था। कुमार ने कहा कि मौजूदा कानून के तहत सीवीसी को समूचे सतर्कता प्रशासन की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही सीवीसी को कार्य करना पड़ता है और इस तरह उसकी स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। आयुक्त ने कहा कि कुछ विशेष दिशा-निर्देशों में सुधार लाकर जांच के मानकों को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके ही अनैतिक व्यवहार पर रोक लगाई जा सकेगी। कुमार ने भ्रष्टाचार के मामलों में कठोरता के साथ कदम उठाने और ईमानदार लोगों के लिए बेहिचक काम करने का माहौल सुनिश्चित करने को आयोग की प्राथमिकता बताया। उन्होंने बताया कि विजिलेंस के काम को और उद्देश्यपरक और प्रभावी बनाने के लिए आयोग जांच के अपने मानक विकसित कर रहा है। भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा कि आयोग का भार बढ़ता जा रहा है और मौजूदा मानव संसाधन पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। नियुक्तियों का अधिकार आयोग को नहीं है। आयोग ने जरूरी कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की मांग सरकार से की है। आयुक्त ने कहा कि मौजूदा समय में राष्ट्रमंडल खेलों में अनियमितता और कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों की जांच की जा रही है। आयोग की ताजा प्रदर्शन रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार के लगभग 1681 मामलों का निपटारा किया गया और लगभग 5.94 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई।

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