Wednesday, September 21, 2011

उत्तराखंड में जब्त होंगी अवैध संपत्ति

देहरादून मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी की भ्रष्टाचार के खिलाफ और आम जनता को पारदर्शी प्रशासन को लेकर छेड़ी गई मुहिम का असर कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों के रूप में सामने आया। इस कड़ी में लोक सेवा अधिकार, लोक सेवकों की अवैध रूप से अर्जित धन या संपत्ति के अधिग्रहण संबंधी विधेयकों के मसौदे को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी। लोक सेवकों के भ्रष्टाचार के मामलों के लिए विशेष अदालतें गठित होंगी और इसके जरिए अवैध तरीके से अर्जित धन या संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में ले सकेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट की दूसरी बैठक में सरकारी सेवकों के लिए तबादला नीति के एक्ट के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखाई गई। वहीं बेनाप भूमि को रक्षित वन भूमि घोषित करने के अविभाजित उत्तरप्रदेश शासनकाल के फैसले को कैबिनेट ने निरस्त कर दिया। इससे विशेष तौर पर पर्वतीय जिलों में चार लाख हेक्टेयर जमीन विकास कार्यो के लिए उपलब्ध होगी। कैबिनेट ने अनुपूरक बजट के साथ जनहित में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगा दी। जनता को आने वाले समय में सरकारी कामकाज में इसकी झलक दिखाई देगी। उड़ीसा, बिहार, मध्यप्रदेश और हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी लोक सेवकों की अवैध रूप से कमाई गई संपत्ति और धनराशि अब सरकार के खाते में आएगी। इस संबंध में प्रस्तावित विधेयक के मसौदे में दो महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई हैं। इनमें भ्रष्टाचार के मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन और विशेष अदालतों में राज्य सरकार अनधिकृत अर्जित संपत्ति या धन का अधिग्रहण करेगी। इसमें संबंधित लोकसेवक को भी पक्ष रखने का मौका दिया गया है। सेवा का अधिकार विधेयक के प्रस्तावित मसौदे में राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, खतौनी, आय प्रमाण पत्र समेत नागरिक सेवाएं चिन्हित की गई हैं। यह विधेयक दिल्ली, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में लागू किया जा चुका है। पर्वतीय जिलों में अब ग्राम पंचायत की बेनाप जमीन वन महकमे के खाते में नहीं जाएगी। ब्रिटिश शासनकाल में 17 अक्टूबर, 1893 और फिर उत्तरप्रदेश शासन के 17 मार्च, 1997 के शासनादेश से रक्षित वन भूमि में शामिल की गई बेनाप भूमि से उत्तराखंड की परेशानी बढ़ी हुई थीं। कैबिनेट ने उप्र शासनादेश को निरस्त कर दिया। वहीं राज्य में प्रत्येक वर्ष राज्य कर्मचारियों के तबादलों के लिए नया एक्ट लागू होगा। इसके प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। अब सुगम क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक अवधि तक तैनात कर्मियों को दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य सेवाएं देनी पड़ेंगी। चार जिलों दून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में पहले चरण में ई-गवर्नेस की ओर कदम बढ़ाते हुए ई-स्टैंपिंग व्यवस्था लागू की गई। अब इन जिलों में लोगों को स्टांप वेंडरों के साथ आनलाइन स्टांप भी उपलब्ध होंगे। कुमाऊं मंडल विकास निगम के अनुसूचित जनजाति विभाग के सेवानिवृत्त कर्मियों को एरियर के भुगतान पर अड़ंगा कैबिनेट ने दूर कर दिया। विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के चलते कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग नहीं की गई

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