Tuesday, September 13, 2011

प्रणब के ओएसडी के निर्देश पर अन्ना को पागल बताने वाली चिट्ठी वेबसाइट पर डाली थी

नई दिल्ली जनलोकपाल के मुद्दे पर जनता के सुझावों में अन्ना हजारे को सांप्रदायिक और पागल बताने वाली चिट्ठी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ तैनात विशेष कार्याधिकारी के निर्देश पर सरकारी वेबसाइट पर डाली गई। यहां यह भी काबिले गौर है कि लोकपाल विधेयक पर लोगों की राय जानने की घोषणा के मामले में सरकार ने न तो इसकी कोई अधिसूचना और न ही कोई विज्ञापन जारी करने की जहमत उठाई। कार्मिक मंत्रालय ने आइटीआइ कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा किया है। मालूम हो कि दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) के 30 जुलाई 2011 के अंक में अन्ना को पागल बताने वाली चिट्ठी को सरकारी वेबसाइट पर डाले जाने की खबर छापी गई थी। इसी आधार पर सुभाष चंद्र अग्रवाल ने आरटीआइ दाखिल कर इससे संबंधित सूचनाएं मांगी थीं। एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर लोगों की राय जानने की घोषणा के बाबत सरकार की ओर से न तो अधिसूचना जारी की गई और न ही विज्ञापन दिया गया। हालांकि सरकार की इस हवाई घोषणा के बाद 706 सुझाव हार्ड कॉपी के रूप में और 14,875 सुझाव ई-मेल से प्राप्त हुए। इनमें से 22 सुझावों को वेबसाइट पर अपलोड किया गया, जिसमें अन्ना को सांप्रदायिक और पागल बताने वाली चिट्ठी भी शामिल है। एक अन्य सवाल में जवाब में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इन सुझावों का चयन कर उसे वेबसाइट पर डाला गया। संयुक्त प्रारूप समिति के और किन सदस्यों या केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी की गई है, इसके जवाब में संख्या तो नहीं बताई गई, लेकिन इतना जरूर कहा गया कि अभी लोगों द्वारा भेजे गए कई सुझावों की जांच की जा रही है। लोकपाल को लेकर केंद्र और अन्ना हजारे की टीम में कई मुद्दों पर ठन गई थी। इसके बाद हालात पर काबू पाने और लोकपाल को सशक्त करने के लिए सरकार ने लोगों से सुझाव मांगे थे

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