Saturday, September 10, 2011
न्यायिक बिल पर टीम अन्ना हमलावर
नई दिल्ली लोकपाल बिल के बाद अब टीम अन्ना ने न्यायिक जवाबदेही बिल पर भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अन्ना के करीबी सहयोगी प्रशांत भूषण ने लचर न्यायिक उत्तरदायित्व बिल पेश करने पर सरकार को आड़े हाथों लिया। साथ ही कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी जजों के भ्रष्टाचार की आपराधिक जांच के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। प्रशांत भूषण के मुताबिक सरकार ने न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के मामले में आम जनता के साथ धोखा किया है। संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद तो सरकार का दोहरा चरित्र और स्पष्ट हो गया है। इस बिल में तो सरकार ने न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्रावधान किया नहीं था, संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इसके लिए कोई सुझाव नहीं दिया है। भूषण के मुताबिक संसदीय समिति की रिपोर्ट में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक कार्यो की जांच के लिए कोई प्रावधान नहीं किए गए हैं जबकि संसदीय समिति ने खुद माना है कि समिति के सदस्यों की साझा भावना थी कि जजों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था अपारदर्शी और अक्षम है। यह भावना होने के बावजूद संसदीय समिति ने जो सुझाव दिए हैं वे उल्टा पूरी प्रक्रिया को और अपारदर्शी बनाएंगे और साथ ही यह व्यवस्था सार्वजनिक निगरानी से भी दूर रहेगी। भूषण के मुताबिक स्थायी समिति की रिपोर्ट संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता में भी हस्तक्षेप किया गया है। इसने सुझाव दिया है कि न्यायपालिका पर निगरानी के लिए बनने वाली ओवरसाइट कमेटी में दो संसद सदस्यों और भारत सरकार के अटार्नी जनरल को भी शामिल किया जाए। हालांकि प्रशांत भूषण ने फिलहाल इस मुद्दे को अभी न्यायिक उत्तरदायित्व और सुधार के लिए आंदोलन (कैंपेन फॉर ज्यूडीशियल एकाउंटेबलिटी एंड रिफार्म्स) के मंच से उठाया है, जिसके वह संयोजक हैं। इस संगठन से वह पहले भी न्यायिक सुधारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। अन्ना खुद भी स्पष्ट कर चुके हैं कि जजों के भ्रष्टाचार के लिए कानून बनवाना उनके आंदोलन का हिस्सा है
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