Friday, September 2, 2011

राजग सरकार तक पहुंची स्पेक्ट्रम घोटाले की आंच

नई दिल्ली 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के कामकाज पर निगाह गड़ा दी है। दूरसंचार क्षेत्र के तत्कालीन फैसलों में पीएमओ की भूमिका को जांचने के लिए समिति ने हर जरूरी दस्तावेज, फाइलें, कैबिनेट नोट तलब कर लिए हैं। यहां तक कि समिति ने 1998 से 2001 के बीच पीएम को मिले सांसदों के पत्रों और उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा भी मंगा लिया है। जेपीसी अब वाजपेयी सरकार के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में हुए फैसलों की गहरी छानबीन कर रही है। भारी लाइसेंस फीस की बोली लगाकर संकट में फंसी कंपनियों को राजस्व भागीदारी प्रणाली में लाने का फैसला उसी दौर का था। सेलुलर कंपनियों की लाइसेंस अवधि (10 से 15 साल) भी पहली बार उस दौर में बढ़ाई गई थी। सूत्रों के अनुसार, जेपीसी तब के फैसलों में पीएमओ की भूमिका जांचना चाहती है। समिति के सामने 9 जून, 1998 की वह चिट्ठी भी जल्द पहुंचेगी, जिसमें कुछ सांसदों ने प्रधानमंत्री से दूरसंचार कंपनियों को रियायत देने की मांग की थी। समिति ने इस पत्र की पृष्ठभूमि में ही सांसदों और वाजपेयी के बीच हुए सभी पत्र व्यवहारों का ब्योरा मांगा है। समिति वाजपेयी दौर के तीन अहम फैसलों को परख रही है। पहला फैसला कंपनियों को लाइसेंस फीस की जगह राजस्व भागीदारी प्रणाली पर ले जाने (माइग्रेशन पैकेज) का था। इस फैसले का आधार बनने वाली आइसीआइसीआइ की रिपोर्ट और औद्योगिक लागत एवं मूल्य ब्यूरो (बीआइसीपी) की रिपोर्ट समिति के सामने जाने वाली है। इस फैसले से संबंधित अटार्नी जनरल की सिफारिशें, कानूनी सलाहकार की राय, दूरसंचार विभाग की फाइलें, माइग्रेशन मिलने से पहले कंपनियों पर बकायेदारी और संबंधित कैबिनेट नोट भी समिति ने मंगा लिए हैं। सितंबर, 1998 में कंपनियों की लाइसेंस अवधि 10 से बढ़ाकर 15 साल की गई थी। यह फैसला भी समिति की जांच के दायरे में है। समिति ने इससे जुड़े कैबिनेट नोट और अन्य दस्तावेज तलब किए हैं। समिति उस समय ट्राई के कामकाज की गहराई में भी जाना चाहती है। उस दौर में ट्राई चेयरमैन जस्टिस एसएस सोढ़ी और दूरसंचार विभाग के बीच असहमतियां काफी चर्चित थीं। समिति ने दूरसंचार क्षेत्र मेंतत्कालीन विवादों से जुडे़ अदालती फैसले, प्रधानमंत्री के सचिव एनके सिंह और आइसीआइसीआइ बैंक के चेयरमैन केवी कामथ के बीच पत्र संवाद का ब्योरा भी मांगा है। (प्रमोद महाजन के फैसलों पर एफआइआर की तैयारी, पेज-3 पर

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